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सीपीआई में अब ओटीटी, ई- कॉमर्स के आंकड़े भी जुड़ेंगे

महंगाई मापने सूचकांक में खान-पान की वस्तुओं का भार किया कम नई दिल्ली। महंगाई मापने के सूचकांक सीपीआई में अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को भी मार्केट प्लेस माना जाएगा और उसके डाटा भी जुड़ेंगे। महंगाई कितनी बढ़ी, कितना दबाव जेब पर पड़ा और रोजमर्रा का खर्च कितना बदला, इन सबका जवाब देने वाला सबसे अहम पैमाना […]

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Gold-Silver Prices

सोने के जेवरात। फोटो: पत्रिका

महंगाई मापने सूचकांक में खान-पान की वस्तुओं का भार किया कम

नई दिल्ली। महंगाई मापने के सूचकांक सीपीआई में अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को भी मार्केट प्लेस माना जाएगा और उसके डाटा भी जुड़ेंगे। महंगाई कितनी बढ़ी, कितना दबाव जेब पर पड़ा और रोजमर्रा का खर्च कितना बदला, इन सबका जवाब देने वाला सबसे अहम पैमाना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) अब बदलने जा रहा है। केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय ने (सीपीआई) की नई श्रृंखला में आधार वर्ष 2012 से बदलकर 2024 किया है।

घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण बना है आधार

सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने बताया कि नई श्रृंखला में वस्तुओं और सेवाओं की बास्केट तथा उनके भार को नवीनतम घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस 2023-24) के आधार पर अपडेट किया गया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाजारों की संख्या 25 प्रतिशत बढ़ी है। अब टैबलेट आधारित डेटा संग्रह प्रणाली (सीएपीआई) अपनाई जाएगी।

बड़े शहरों से लेंगे ऑनलाइन बाजार के भाव

नई सीपीआई श्रृंखला में फिजिकल दुकानों से ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी भाव लिए जाएंगे। 25 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को एक अतिरिक्त ‘ऑनलाइन बाजार’ माना जाएगा। 2011 की जनसंख्या के अनुसार मुम्बई, दिल्ली, बैंगलुरू, हैदराबाद, अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता, सूरत, पुणे, जयपुर, लखनऊ, कानपुर ऐसे बारह शहर हैं जिनकी आबादी 25 लाख से ज्यादा है।

अन्तरराष्ट्रीय हवाई किराया भी होगा शामिल

ओटीटी स्ट्रीमिंग ब्रॉडबैंड जैसी सेवाओं की कीमतें, सीधी अन्तरराष्ट्रीय उड़ानों का किराया भी अब शामिल होगा। घर के किराए में अब ग्रामीण क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा।

3 से 5 साल में बदलेगा आधार वर्ष, बढ़ा सैंपल साइज

सीपीआई के आधार वर्ष को 3 से 5 वर्षों में बदला जाएगा। अब सैंपल साइज में 299 के बजाय 358 आइटम होंगे और कीमतों का डेटा अब 1,181 और 1,114 के बजाय 1,465 ग्रामीण बाजारों और 1,395 शहरी बाजारों से इकट्ठा किया जाएगा।

घटा खाने-पीने की वस्तुओं का भार

खाद्य एवं पेय पदार्थ श्रेणी का भार नए सूचकांक में घटा है। सीपीआई 2012 के आधार पर यह 45.86% से घट कर 40.10 % रहा है। वहीं सीपीआई 2024 के पैमाने के आधार पर यह 36.75 % हुआ है जो उन्हीं पैमानों के आधार पर सीपीआई 2012 में 42.62% था।

बढ़ेगी वैश्विक समानता

नई सीरीज में यूएनएसडी के सीओआईसीओपी 2018 को अडॉप्ट किया गया है। यह फ्रेम वर्क घरों के सामान और सेवाओं के खर्च को होमोजिनियस श्रेणी रखता है। इससे नई सीरीज अन्तरराष्ट्रीय सिस्टम के अनुरूप हो जाएगी।

सोना, चांदी और बिजली के लिए नया तरीका

सीपीआई में सोने और चांदी के उन्हीं गहनों के दाम शामिल होंगे जो बाजार में आमतौर पर मिलते हैं। बिजली के दाम अलग-अलग खपत स्तर (100,200,200,400 यूनिट) के हिसाब से डिस्कॉम्स से लिए जाएंगे। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी, रेल किराया जैसी कीमतें केंद्र स्तर पर जुटाई जाएंगी।

मुफ्त सामाजिक योजनाएं नहीं होंगी शामिल

सीपीआई में नियोक्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए आवास और सामाजिक योजनाओं के लाभ जैसे मुफ्त अनाज को शामिल नहीं किया जाएगा।

2012 की श्रेणियों के आधार पर ऐसे बदला श्रेणियों का भार

श्रेणी 2012 2024
खाद्य एवं पेय पदार्थ 45.86 40.10
पान- तंबाकू और नशीले पदार्थ 2.38 2.99
कपड़े और जूते 6.53 6.39
आवासन 10.07 11.88
ईंधन और बिजली 6.84 5.49
शेष (मिस्लेनियस) 28.32 33.15

(मंत्रालय के अनुसार)

नई सीरीज की 12 श्रेणियों में सूचकांक के लिए भार

श्रेणी भार
खाद्य एवं पेय पदार्थ 36.75
पान तंबाकू एवं नशीले पदार्थ 2.98
कपड़े एवं फुटवियर 6.38
हाउसिंग, पानी, बिजली, गैस व अन्य ईंधन 17.66
फर्निशिंग्स, घरेलू उपकरण, रूटीन घरेलू रखरखाव 4.46
स्वास्थ्य 6.10
ट्रांसपोर्ट 8.79
इंफोर्मेशन एवं कम्युनिकेशन 3.6
मनोरंजन, खेल एवं सांस्कृतिक 1.51
शिक्षा सेवाएं 3.33
रेस्टोरेंट एवं अकोमेडेशन सेवाएं 3.34
पर्सनल केयर, सोशल सुरक्षा एवं मिस्लेनियस गुड्स एवं सर्विस 5.03

(सीपीआई पर एक्सपर्ट समूह की रिपोर्ट के अनुसार)