
नई दिल्ली। ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यमी के रूप में स्थापित करने की केंद्र सरकार की रणनीति अब वैश्विक मंचों तक पहुंचने लगी है। भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स 2026 में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने देशभर की ‘लखपति दीदियों’ और महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को अंतररष्ट्रीय खरीदारों और वस्त्र उद्योग के प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया।
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लगाए गए मंडप में हथकरघा, ढोकरा धातु शिल्प, जूट, बांस, कोल्हापुरी चमड़ा, लकड़ी के उत्पाद, मनका शिल्प, रेशमी आभूषण और जलकुंभी से बने पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के पारंपरिक कौशल को बड़े बाजार और निर्यात के अवसरों से जोडऩा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और महिला उद्यमियों से संवाद किया।
उन्होंने कहा कि अब ध्यान केवल आजीविका उपलब्ध कराने पर नहीं, बल्कि टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी ग्रामीण उद्यम विकसित करने पर है, ताकि महिलाओं की आय स्थायी रूप से बढ़ सके। प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण सरस शक्ति कलेक्शन रहा। इसमें स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उच्च गुणवत्ता वाले हस्तनिर्मित उत्पादों को संस्थागत और कॉरपोरेट उपहार के रूप में पेश किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण उत्पादों को सरकारी और निजी संस्थानों में बड़ा बाजार मिल सकता है। वर्तमान में मिशन के तहत 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं।
Updated on:
16 Jul 2026 12:03 pm
Published on:
16 Jul 2026 12:03 pm
