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फिल्म में धार्मिक परंपराओं के विपरीत किया भगवान जगन्नाथ का चित्रण, ओडिशा HC ने लगाई रोक तो SC पहुंचे मेकर्स

एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' पर ओडिशा हाई कोर्ट की रोक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। निर्माता पक्ष ने जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि रोक से करोडों रुपये का नुकसान हुआ है।
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Mahaprabhu Jagannath film

महाप्रभु जगन्नाथ फ़िल्म (फोटो- एएनआई)

ओडिशा हाई कोर्ट द्वारा एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज पर लगाई गई रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। निर्माता पक्ष ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए जल्द सुनवाई की मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामथ ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बच्चों के लिए बनाई गई एनिमेटेड फिल्म है और इस पर रोक के कारण निर्माताओं को करोडों रुपये का नुकसान हुआ है। मुख्य न्यायाधीश ने मामले को गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग

वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामथ ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि फिल्म एक एनिमेटेड फीचर है, जिसका उद्देश्य बच्चों को भगवान जगन्नाथ की कथा से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि फिल्म की रिलीज पर रोक लगने से निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। साथ ही उन्होंने अदालत से मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि याचिका को गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

ओडिशा हाई कोर्ट ने क्यों लगाई थी रोक?

ओडिशा हाई कोर्ट ने 17 जुलाई को प्रस्तावित रिलीज से पहले फिल्म के प्रदर्शन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि रथ यात्रा के दौरान फिल्म का प्रदर्शन सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। साथ ही अदालत ने प्रारंभिक तौर पर यह भी माना कि फिल्म का प्रस्तुतीकरण स्कंद पुराण और भगवान जगन्नाथ से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान के तहत संरक्षित अधिकार है, लेकिन यह पूर्ण अधिकार नहीं है और उस पर अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।

भगवान जगन्नाथ के चित्रण पर जताई आपत्ति

फिल्म के खिलाफ दायर जनहित याचिका में दावा किया गया था कि 6 जून को जारी टीजर के बाद ओडिशा में व्यापक विरोध शुरू हो गया। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) समेत कई पक्षों ने फिल्म के शीर्षक और भगवान जगन्नाथ के चित्रण पर आपत्ति जताई। इसके बाद निर्माता ने गजपति महाराजा और एसजेटीए प्रतिनिधियों के लिए विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की, जहां कुछ दृश्यों में बदलाव का सुझाव दिया गया। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि बदलाव का आश्वासन देने के बावजूद निर्माता ने बिना पर्याप्त संशोधन के 17 जुलाई को फिल्म रिलीज करने की घोषणा कर दी। हालांकि निर्माता ने अदालत में कहा कि फिल्म एक काल्पनिक रचना है, उचित डिस्क्लेमर के साथ बनाई गई है और उसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण प्राप्त है।

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