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‘DMK से NCP तक’, परिसीमन बिल पास कराने के लिए किन पार्टियों पर दांव लगा सकती है बीजेपी? समझे पूरा गणित

Monsoon Session Delimitation Bill: लोकसभा चुनाव 2029 से पहले केंद्र सरकार संशोधित परिसीमन विधेयक लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित बदलाव के तहत सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में करीब 50% बढ़ोतरी का प्रावधान शामिल किया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य विपक्ष की आशंकाएं दूर कर व्यापक सहमति बनाना और संसद में दो-तिहाई समर्थन हासिल करना है।
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भारत

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Ashib Khan

Jul 16, 2026

Delimitation Bill

परिसीमन बिल को पास कराना बीजेपी का मुख्य एजेंडा है (Photo-IANS)

Delimitation Bill: लोकसभा चुनाव 2029 से पहले परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार नई राजनीतिक रणनीति पर काम करती दिख रही है। माना जा रहा है कि मानसून सत्र में सरकार संशोधित परिसीमन विधेयक ला सकती है, जिसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में करीब 50 फीसदी बढ़ोतरी का प्रावधान स्पष्ट रूप से शामिल होगा। इसका मकसद डीएमके और एनसीपी (शरद पवार गुट) समेत विपक्षी दलों की आशंकाएं दूर कर व्यापक सहमति बनाना और विधेयक के लिए आवश्यक दो-तिहाई समर्थन जुटाना है। हालांकि, सरकार ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सीटों का पुनर्वितरण पर रहा विवाद

बता दें कि सरकार की ओर से अप्रैल में विशेष सत्र में महिला आरक्षण के साथ परिसीमन विधेयक लाया गया था। इस विधेयक का सबसे बड़ा विवाद लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण को लेकर रहा है। इस पर दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। यदि केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण हुआ तो उनकी संसद में हिस्सेदारी घट सकती है, जबकि अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों की सीटें बढ़ जाएंगी। इसी आशंका के चलते तमिलनाडु की डीएमके समेत दक्षिण के कई छोटे दल इस मुद्दे का विरोध करते रहे हैं।

शाह ने लोकसभा में किया था वादा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले संसद में आश्वासन दिया था कि किसी भी राज्य की मौजूदा सीटें कम नहीं होंगी और सभी राज्यों की सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। लेकिन विपक्ष का कहना था कि यह आश्वासन राजनीतिक बयान तक सीमित है और इसे विधेयक का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इस पर शाह ने बहस के दौरान एक घंटे के लिए संसद की कार्यवाही बंद करने का आग्रह करते हुए संशोधित विधेयक लाने का वादा कर दिया था।

शरद पवार की एनसीपी भी देगी समर्थन

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों विधेयकों पर शरद पवार की पार्टी एनसीपी भी एनडीए का साथ दे सकती है। इस पर सुप्रिया सुले ने कहा कि परिसीमन पर नया विधेयक के पेश होने के बाद उस पर 24 घंटे में हम फैसला करेंगे।

उन्होंने कहा कि पिछले परिसीमन विधेयक के लाने से पहले किरेन रिजिजू ने बजट सत्र से पहले हमें बुलाकर बताया गया था कि सभी राज्यों में 50 फीसदी सीटें बढ़ाई जाएंगी। 

सदन की स्थिति और संविधान संशोधन का गणित

विवरणसंख्या/शर्त
कुल सांसद540
संविधान संशोधन के लिए आवश्यक संख्यासदन में उपस्थित सांसदों का दो तिहाई (2/3) बहुमत और कुल संख्या का 360

एनडीए (NDA) का वर्तमान समीकरण

दल / गुटसांसदों की संख्या
एनडीए (मूल)292
टीएमसी (TMC)+ 20
शिवसेना (यूबीटी से अलग गुट)+ 6
कुल संभावित संख्या318

भाजपा की निगाह में अन्य दल (जिनकी कुल संख्या 41 है)

दल का नामसांसदों की संख्या
डीएमके (DMK)22
एनसीपी - एसपी (NCP - SP)8
वाईएसआरसीपी (YSRCP)4
जेएमएम (JMM)3
वीसीके (VCK)2
आरएलपी (RLP)1
अकाली दल1
कुछ निर्दलीय सांसद(शेष संख्या इसी में शामिल है)

बीजेपी की नजर किस पर 

लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या 543 है। इसमें से तीन सीटें खाली हैं। यानी फिलहाल सदन में 540 सदस्य हैं। सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सीटों की आवश्यकता होगी। 

सदन में दो तिहाई बहुमत हासिल के लिए बीजेपी की अब कई पार्टियों पर नजर है। जिनकी सदस्यों की संख्या 41 है। यदि ये पार्टियां सदन में एनडीए का समर्थन देती है तो विधेयक पास हो जाएगा। जिसमें डीएमके सबसे महत्वपूर्ण है। DMK के लोकसभा में 22 सदस्य है। इसके अलावा शरद पवार के 8, वाईएसआरसीपी के 4, जेएमएम के 3, वीसीके के 2, आरएलपी के एक और अकाली दल के एक सांसद भी नजर है। इसके अलावा कुछ निर्दलीय सांसदों पर भी BJP की नजर है। 

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