दरअसल, संसद के मानसून सत्र की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे पर हंगामे से हुई। वहीं सत्र का समापन छात्र आंदोलन पर पुलिस बल और राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर चर्चा की मांग पर हंगामे से हो गया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष का रवैया अडिय़ल बना रहा। ऐसे में अधिकांश समय हंगामा और शोर शराबा हुआ, जिसकी वजह से प्रश्नकाल बाधित रहा। जबकि विधेयक तो पारित हुए, लेकिन उन पर चर्चा नहीं हो सकी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सत्र में संसद से कुल 12 विधेयक पारित हुए। लोकसभा में केवल 19 फीसदी और राज्यसभा में 39 फीसदी कामकाज हुआ। यानी लोकसभा के लिए निर्धारित समय का बड़ा हिस्सा हंगामे, नारेबाजी और स्थगन की भेंट चढ़ गया।