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देश के अमृतकाल में लोकतंत्र का नया मुकाम

- प्रवेश से पहले होगी हवन-पूजा

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देश के अमृतकाल में लोकतंत्र का नया मुकाम

देश के अमृतकाल में लोकतंत्र का नया मुकाम

नए संसद भवन के उद्घाटन के साथ ही देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक स्वर्णिम इतिहास और जुड़ जाएगा। लगभग एक सदी पुराने संसद भवन में जन्मा दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपने अमृतकाल में नई अंगडाई के साथ दुनिया को दिशा दिखाने की ओर अग्रसर होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को संसद की नई इमारत राष्ट्र को समर्पित करेंगे। रेकॉर्ड ढाई साल में तैयार हुआ अत्याधुनिक सुविधाओं वाला नया भवन 65 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बना है। यह अगले डेढ़ सौ साल की जरूरतों को देखते हुए बनाया गया है। लोकार्पण समारोह को यादगार बनाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। भवन के लोकार्पण से पहले 28 मई को सुबह से दोपहर तक पूजा-हवन के कार्यक्रम होंगे।

- मोदी दोपहर 12 बजे करेंगे लोकार्पण
-सुबह 7 बजे से शुरू हो जाएंगे कार्यक्रम

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को दोपहर 12 बजे लोकतंत्र के मंदिर (संसद) की नई इमारत राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इससे पहले लोकार्पण समारोह के कार्यक्रमों का आगाज सुबह 7 बजे से पूजा-हवन के साथ हो जाएगा।

संसद के नए भवन के लोकार्पण की तैयारियां अंतिम दौर में है। नए भवन के आसपास की सडक़ों का निर्माण चल रहा है। संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास पांडाल बनाने का सामान पहुंच चुका है। वहीं नए भवन के लोकार्पण से पहले 28 मई को सुबह 7:30 से 8:30 बजे तक हवन और पूजा होगी। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत कई मंत्री शामिल होंगे। जबकि सुबह 8:30 से 9 बजे के बीच लोकसभा के अंदर सेंगोल को स्थापित किया जाएगा। सुबह 9.30 बजे प्रार्थना सभा होगी, इस प्रार्थना सभा में शंकराचार्य सहित कई बड़े विद्वान पंडित और साधु संत मौजूद रहेंगे।

दोपहर 12 बजे से लोकार्पण समारोह का दूसरा चरण शुरू होगा। इसमें दो शॉर्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके बाद राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति का संदेश पढ़ेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन आखिर में होगा।

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