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NITI Aayog: देश में इस तारीख तक चलने लगेंगी 50 हजार ई-बसें, बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी आएगी जल्द

केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) के लिए कई योजनाएं तैयार कर रही है। नीति आयोग द्वारा ईवी के कई प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता ईवी टू-व्हीलर, थ्री-वीलर और बसों के सेगमेंट पर है। हाल ही में गुरुग्राम में ईवी मोबिलिटी पर आयोजित ईवीकॉन इंडिया कार्यक्रम में नीति आयोग के ई-मोबिलिटी के डायरेक्टर रणधीर सिंह शामिल हुए। उन्होंने पत्रिका से बातचीत में केंद्र सरकार की ईवी को लेकर तैयार की गई कई परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी।

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NITI Aayog: देश में इस तारीख तक चलने लगेंगी 50 हजार ईवी बसें, बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी आएगी जल्द

NITI Aayog: देश में इस तारीख तक चलने लगेंगी 50 हजार ईवी बसें, बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी आएगी जल्द

नीति आयोग के ई-मोबिलिटी के डायरेक्टर रणधीर सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार देश भर में फर्स्ट कम फर्स्ट बेसिस के तहत 50 हजार इलेक्ट्रिक बसों का टेंडर जारी कर रही है। इसे अगले साल मार्च 2023 तक पूरा करने की योजना है। जिससे देश भर में ई-बसें चलने लगेंगी। उन्होंने बताया कि सरकार का फोकस टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर ईवी सेगमेंट के व्हीकल पर भी बहुत ज्यादा है। 76 से 80 फीसदी बाजार में टू-व्हीलर सेगमेंट का शेयर है, जबकि फोर वीलर व्हीकल का कुल शेयर 13 फीसद और पैसेंजर व्हीकल का 10 फीसदी से भी कम शेयर है।

रणधीर सिंह ने बताया कि सरकार ने फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल (फेम)-2 के लिए 10 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। जिसमें से एक हजार करोड़ रुपये सिर्फ ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ही निर्धारित किए हैं। इसके साथ ही इंडस्ट्री के लिए ऑटो पीएलई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) के लिए भी फंड निर्धारित किए गए हैं। इसमें कई ओईएम (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर) को ईवी की प्रोडक्शन करने के लिए लेटर जारी कर दिए गए हैं। इनमें 18 ओईएम ईवी वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग करेंगे और 67 ओईएम ईवी के इक्विमेंट की मैन्युफैक्चरिंग करेंगे।

हाइवे के दोनों तरफ बनेंगे ईवी चार्जिंग स्टेशन

रणधीर सिंह ने बताया कि प्रस्ताव है कि हाईवे और एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ हर 25 किमी पर स्लो ईवी चार्जिंग स्टेशन और हर 100 किमी पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। ईवी बसों की न्यूनतम रेंज 250 किमी तक होती है। मौजूदा समय में एक शहर से दूसरे शहर में बसें ट्रेवल करती हैं, तो वह कहीं न कहीं पर आधे घंटे के लिए रुकती हैं। आधे घंटे में बसें फास्ट चार्जिंग से 100 किमी तक चार्ज हो जाएगी। फिलहाल हर बार ईवी को पूरा चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होती है। स्लो चार्जिंग स्टेशन में ईवी बसें एक बार में 50 किलोमीटर तक चार्ज करके आगे बढ़ सकती हैं। जरूरी नहीं है कि एक बार में ईवी बसों को पूरा 250 किलोमीटर ही चार्ज करने की जरूरत पड़े।

अगस्त के अंत में बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी आएगी

रणधीर सिंह ने बताया कि ईवी टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी बहुत ही जरूरी है। इन दोनों सेगमेंट के लिए चार्जिंग स्टेशन की जरूरत नहीं है। बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी से लोग लिथियम आयरन बैटरी को लीज पर लेकर अपने ईवी टू-व्हीलर व थ्री-व्हीलर में लगा सकते हैं। इसमें उन्हें बैटरी को चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह लोगों को सस्ती पड़ेगी। यह पॉलिसी अगस्त के अंत में लॉन्च होगी। इसमें हर बैटरी का एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर भी जारी होगा। जिससे बैटरी को ट्रेस किया जा सके और उसे रिसाइकल और रियूज करने में सहायता मिल सके। ई-वेस्ट मैनेजमेंट के लिए इस तरह की पॉलिसी काफी अहम है।

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