. नोटबंदी का फैसला रिजर्व बैंक के सुझाव पर हुआ या सरकार के आदेश से? इस सवाल का राज और भी गहरा गया है। एक आरटीआई में मांगी गई सूचना के तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने नोटबंदी को लेकर ज्यादा विवरण देने से इनकार कर दिया है। आरबीआई ने कहा है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। सबसे पहले संसद में ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने बताया था कि आरबीआई ने ही सरकार को बड़े नोटों पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था।
नोटबंदी की घोषणा के तीन घंटे पहले ही आरबीआई के बोर्ड ने इस पर अपनी सहमति जताई थी। वहीं कुछ दिनों पहले आरबीआई ने कानून निर्माताओं को जानकारी दी थी कि उसने सरकार के कहने पर अपने सुझाव दिए थे। सरकार के प्रस्ताव के बाद ही आरबीआई के बोर्ड मेंबर्स ने इसका सुझाव दिया था। यह जानकारी ब्लूमबर्ग न्यूज को आरटीआई में मिली है।
आरबीआई से जबरदस्ती तो नहीं की
आरबीआई के जवाब नहीं देने के बाद अब सबसे बड़ा रहस्य यही है कि आखिर किसके कहने पर नोटबंदी जैसा बड़ा निर्णय लिया गया। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार ने बिना आरबीआई की मर्जी से इसे लागू कराया या फिर आरबीआई के पैनल ने इसे जल्दबाजी में लागू किया । अगर सरकार ने जबरदस्ती अपने इस फैसले को बैंक से लागू करवाया है तो इससे बैंक की स्वतंत्रता को खतरा पहुंचा है।
20 को गवर्नर देंगे जवाब
इस मुद्दे पर ज्यादा जानकारी 20 जनवरी को आ सकती है। 20 जनवरी को आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल संसदीय कमेटी के सामने नोटबंदी के प्रभावों पर जानकारी देंगे।
जानकार हैं हैरान
सिंगापुर में रहने वाले भारतीय अर्थशास्त्री शिलन शाह कहते हैं कि ये बात हैरान करने वाली है कि आरबीआई ने कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया है