
लंदन. अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खाना पहुंचाना जितना महंगा है, उतना ही मुश्किल भी। यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) ऐसी तकनीक पर काम कर रही है, जिससे भविष्य में मसले हुए आलू और डेसर्ट जैसे जायकेदार भोजन अंतरिक्ष में ही तैयार किए जा सकेंगे। यह प्रयोग कामयाब रहा तो दो साल में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आइएसएस) पर मिनी फूड फैक्ट्री लगाई जा सकती है।हाल ही अंतरिक्ष में नौ महीने बिताकर लौटीं भारतवंशी सुनीता विलियम्स ने कहा था कि अंतरिक्ष में उन्होंने सबसे ज्यादा ताजे और जायकेदार खाने को याद किया। ईएसए ऐसी तकनीक विकसित कर रही है, जिससे खान के लिए जरूरी वनस्पति को आइएसएस की लैब में उगाया जाएगा और वहीं खाना तैयार किया जा सकेगा। ईएसए के वैज्ञानिकों का मानना है कि सिर्फ पोषक खाना काफी नहीं है, स्वाद और विविधता भी जरूरी है, ताकि अंतरिक्ष यात्री मन से खा सकें। भविष्य में फ्रेंच, चाइनीज, इंडियन समेत हर तरह की डिश स्पेस में बनाई जा सकेगी।
एक दिन के खाने का खर्च 20 लाख तक
फिलहाल अंतरिक्ष यात्रियों को रोज खाना पहुंचाने में 20,000 पाउंड (करीब 20 लाख रुपए) खर्च होते हैं। जब इंसानों को चांद या मंगल पर भेजा जाएगा तो रोज रॉकेट से खाना भेजना नामुमकिन होगा। ऐसे में स्पेस में ही खाना बनाना जरूरी है। ईएसए की तकनीक न सिर्फ खर्च घटाएगी, बल्कि अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर जीवनशैली की दिशा में पहला कदम होगी।
लैब-ग्रोन फूड में क्या-क्या
अंतरिक्ष में लैब-ग्रोन फूड टेस्ट ट्यूब और मशीनों में जैविक तकनीक से तैयार किया जाएगा। इसमें प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट्स जैसे पोषक तत्व मिलाकर जायकेदार व्यंजन में बदला जाएगा। यह तकनीक पृथ्वी पर पहले से इस्तेमाल हो रही है। अमरीका और सिंगापुर में लैब-ग्रोन चिकन बिक रहा है। ब्रिटेन में लैब-ग्रोन स्टेक को मंजूरी मिलने वाली है।
Published on:
24 Apr 2025 01:51 am
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