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ऑर्डिनेंस फैक्ट्री डे विशेष: ‘सफेद हाथी’ का दाग धोकर अब मुनाफा कमाने लगे हैं आयुध कारखाने

-आज 221 साल का हो जाएगा देश की रक्षा का चौथा हथियार -ओएफबी के निगमीकरण के बाद रक्षा उत्पाद निर्यात में भी तेजी

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ऑर्डिनेंस फैक्ट्री डे विशेष: 'सफेद हाथी' का दाग धोकर अब मुनाफा कमाने लगे हैं आयुध कारखाने

ऑर्डिनेंस फैक्ट्री डे विशेष: 'सफेद हाथी' का दाग धोकर अब मुनाफा कमाने लगे हैं आयुध कारखाने

सुरेश व्यास

नई दिल्ली। स्थापना के 219 साल तक देश के सशस्त्र बलों को हथियार और गोला बारूद उपलब्ध करवाने वाले ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) की जगह इसके 41 आयुध कारखानों के निगमीकरण से न सिर्फ बोर्ड पर लगा 'सफेद हाथी' का दाग साफ हो गया है, बल्कि ये सरकारी इकाइयां घाटे से उबर कर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की नई कहानी लिखने लगी हैं। जो आयुध कारखाने कभी करोड़ों-अरबों के घाटे में थे, वे आज न सिर्फ दुनिया के कई देशों को हथियारों की आपूर्ति करने की बढ़ रहे हैं, बल्कि इनको मुनाफे का स्वाद भी सुहाने लगा है।

अंग्रेजों के जमाने में 18 मार्च 1802 को कोलकाता के कोसीपुर में स्थापना के बाद से लेकर 1979 में नए स्वरूप में आने के बाद एशिया का दूसरा बड़ा और दुनिया का 37वां सबसे बड़ा रक्षा उत्पाद निकाय ओएफबी अब सात कम्पनियों में बंट गया है, लेकिन इसकी महत्ता अविभाजित है। निगमीकरण के बाद बनी नई कम्पनियों में से छह लाभ में आ चुकी है। लगातार देसी-विदेशी कारोबार बढ़ रहा है।

केंद्र सरकार ने 16 जून 2021 को एक अहम फैसला लेकर लगातार घाटे के कारण 'सफेद हाथी' बने बोर्ड के आयुध कारखानों के निगमीकरण का फैसला किया और इसी साल विजयादशमी के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोर्ड की सात नई कम्पनियां राष्ट्र को समर्पित की थी। दरअसल, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मोदी सरकार की सोच को आगे बढ़ाने का यह फैसला अहम साबित हुआ और स्थापना के छह महीने के भीतर ही सात में से छह कम्पनियों पर लगा घाटे का दाग धुल गया।

सशस्त्र बलों के पीछे की सेना

आयुध कारखानों को थल, वायु व नौसेना के बाद देश की रक्षा का चौथा हथियार और सशस्त्र बलों के पीछे की सेना कहा जाता है। देश की तीनों सेनाओं के लिए आयुध सामग्री उपलब्ध करवाने वाले ये कारखाने कई देशों को गोला बारूद, केमिकल व विस्फोटक, हथियार उपकरण, पैराशूट तथा लैदर व क्लोदिंग आइटम सप्लाई करते हैं। फोर्ट विलियम्स मे सबसे पहले 1775 में ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता में आयुध निर्माण की स्वीकृति दी थी। इसके बाद सबसे पहले 1787 में पहली गन फैक्ट्री स्थापित हुई। फिर 1979 में ओएफबी बना और 2021 में निगमीकरण होने से पहले देशभर में 41 फैक्ट्रियों, 9 ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, तीन क्षेत्रीय विपणन केंद्र और पांच क्षेत्रीय सुरक्षा नियंत्रक कार्यालयों का विशाल नेटवर्क रहा है।

दो साल से औपचारिक आयोजन नहीं

आयुध कारखानों में हर साल 18 मार्च को 'ऑर्डिनेंस फैक्टरी डे' मनाए जाने की परंपरा रही है। इस दिन ऑर्डिनेंस फैक्टरी के अधिकारी-कर्मचारी अपने गौरवपूर्ण अतीत को याद करते हैं। लेकिन निगमीकरण के बाद दो साल से औपचारिक रूप से यह दिन नहीं मनाया जा रहा।

अब कमान इन कम्पनियों के हाथ

-म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड
-आर्म्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड
-एडवांस्ड वीपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड
-ट्रूप्स कम्फर्ट्स लिमिटेड
-यंत्र इंडिया लिमिटेड
-इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड
-ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड

भारत से रक्षा निर्यात (राशि करोड़ रुपए में)





























सालराशि
2017-184,682
2018-1910,746
2019-209,116
2020-218,435
2021-2212,815








2022-2313,319 (6 मार्च तक)

(आंकड़े राज्यसभा में रक्षा मंत्री की ओर से पेश जवाब के आधार पर)

यूं बढ़ रहे आत्मनिर्भरता की ओर कदम

रक्षा क्षेत्र में बढ़ रही आत्मनिर्भरता का लोहा अब दुनिया भी मानने लगी है। स्टॉकहोम पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावे की सरकारी नीति के चलते वर्ष 2011-2015 और 2016-2020 के बीच भारत के रक्षा आयात में 33% की कमी आई है, जबकि निर्यात लगातार बढ़ रहा है। आत्मनिर्भरता को बढ़ावे के लिए असॉल्ट व स्नाइपर राइफल, तोप, क्रूज मिसाइल, हल्के लड़ाकू व परिवहन विमान, मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर जैसे 209 हथियारों व सैन्य उपकरणों के आयात पर रोक लगाई जा चुकी है। इस साल के रक्षा बजट में 84,598 करोड़ यानी 68 फीसदी स्वदेशी हथियारों और रक्षा प्रणालियों की खरीद के लिए रखा गया है।

ये प्रमुख हथियार बन रहे आयुध फैक्ट्रियों में

-धनुष होवित्जर तोपें
-एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम
-81 एमएम मोर्टार
-एके-203 राइफल्स
-असॉल्ट राइफल्स
-लाइट मशीन गन
-कार्बाइन
-पिनाका रॉकेट लान्चर
-वायुसेना के लिए 500 किग्रा का जीपी (जनरल परपज) बम
-थल सेना के लिए गोला-बारूद
-नौसेना के लिए सुपर रेपिड माउंट गन

ये भी खींच रहे दुनिया का ध्यान

इसके अलावा डीआरडीओ में विकसित तकनीक के आधार पर बने हथियार, विमान और प्रक्षेपास्त्र भी दुनिया का ध्यान खींच रहे हैं। इनमें बैटल टैंक अर्जुन व पिनाका रॉकेट लॉंचर के अलावा, आकाश, नाग व ब्रह्मोस जैसे प्रक्षेपास्त्र, एचएएल में निर्मित हल्का लड़ाकू विमान तेजस, हल्का लड़ाकू हेलिकॉप्टर प्रचंड, हल्का लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव व रुद्र दुनिया के कई देशों की पसंद बने हैं।