
पथिक सेना एवं अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने गुरुवार को दिल्ली में की प्रेसवार्ता।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 4 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी समुदाय को शिक्षा व नौकरियों में एसटी की तरह आरक्षण देने का ऐलान किया था। उस समय राज्य के रजौरी शहर में सभा को संबोधित करते हुए गृहमंत्री ने कहा था कि केंद्र द्वारा गठित न्यायमूर्ति शर्मा आयोग ने गुज्जर, बकरवाल व पहाड़ी समुदायों को आरक्षण देने की सिफारिश की है। इसे लागू किया जाएगा। वहीं, गुरुवार को पथिक सेना एवं अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने दिल्ली में प्रेसवार्ता करते हुए इस पर आपत्ति जताई। सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुखिया गुर्जर ने सवाल उठाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के गुर्जर बकरवाल समाज को पिछले 30 वर्षों से अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा प्राप्त है और उन्हे अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण की सुविधा मिल रही है। लेकिन पिछले दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के सर्व समाज के पहाड़ी लोगों को एसटी का आरक्षण देने का ऐलान कर दिया है, जोकि गैर संवैधानिक है, जिससे वहां के इस देश भक्त गुर्जर समाज को अपने मिल रहे आरक्षण पर कुठाराघात एवं अतिक्रमण का डर सता रहा है। इस निर्णय से उनमें भारी नाराजगी और आक्रोश है। प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग गुर्जर, डॉक्टर मुशर्रत गुर्जर, श्याम सिंह भाटी, परविंदर सिहं मोहित नागर , एकलव्य बैंसला उपस्थित थे।
राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन में 72 हुए शहीद
सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुखिया गुर्जर ने कहा कि केंद्र सरकार को ये नहीं भूलना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर अगर हिन्दुस्तान का हिस्सा है तो सिर्फ इस गुर्जर बकरवाल समाज की देश भक्ति और शहादत की वजह से है। उधर राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन में 72 सपूत शहीद हो गए थे। तब कहीं जाकर मोस्ट बैकवर्ड क्लास (एमबीसी) के तहत 5 फीसदी आरक्षण मिला वो भी अधूरा। अगर केंद्र सरकार उसे नौवीं अनुसूची में डाल कर लागू करे तब वह कानून की शकल लेगा । अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के अध्यक्ष अनुराग गुर्जर ने कहा कि देश का गुर्जर समाज एक है। अगर हमारे जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के भाईयों के आरक्षण के साथ छेड़छाड़ हुई तो पूरे देश का गुर्जर सड़कों पर उतरेगा जैसे राजस्थान के गुर्जरों के समर्थन में पूरा देश जाम हो गया था।
बिना मापदंड के न दिया जाए आरक्षण, केंद्र करे विचार
अधिवक्ता सुनील बैसला ने बताया कि गुर्जर समाज अपने भेड़ बकरियों के साथ यायावरी और घुमंतू जीवन जी रहा है। सन 1991 में चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री रहते इनकी शैक्षणिक , आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्थिति दयनीय देख कर इनका जीवन स्तर समाज और राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल कर 10 फीसदी आरक्षण दिया था। लेकिन बिना मापदंड पूरे किए वोटों के लालच में सभी पहाड़ियों को आरक्षण दिया जाएगा तो गुर्जर समाज आरक्षण से वंचित हो जायेगा। वहीं, संगठन से जुड़े नरेंद्र गुर्जर का कहना है कि अपने घोषित निर्णय पर केंद्र सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करें। इसलिए आगामी एक नवंबर 2022 को पथिक सेना एवं अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के संयुक्त तत्वावधान में जंतर मंतर दिल्ली में धरना प्रदर्शन करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को ज्ञापन सौंपेंगे। इस प्रदर्शन में जम्मू कश्मीर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब के गुर्जर समाज के लोग उपस्थित रहेंगे। जिसके लिए इन प्रदेशों के गांव गांव में बैठकें करके लोगों से संपर्क किया जा रहा है।
Published on:
27 Oct 2022 08:27 pm
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