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25,530 करोड़ से होगा पीडीएस का आधुनिकीकरण

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को मजबूती देने के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना को मंजूरी दे दी के विस्तार को मंजूरी दे दी। इस योजना के लिए 25,530 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘स्कीम फॉर असिस्टेंस इन राशन ट्रांसपोर्ट एंड हैंडलिंग-इनकम विद ऑटोमेशन इन पीडीएस’ (सार्थक-पीडीएस) को पांच साल के लिए लागू किया गया है। इससे लाभार्थियों की सटीक पहचान होगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की ब्रीफिंग में बताया कि इस योजना से 80 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाने वाली पीडीएस स्कीम के लिए काम किया जाएगा।
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नई दिल्ली

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Abhishek Singhal

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Updated: 28 May 2026, 2:59 PM IST

Ashwani Vaishnav

नई दिल्ली। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को मजबूती देने के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना को मंजूरी दे दी के विस्तार को मंजूरी दे दी। इस योजना के लिए 25,530 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘स्कीम फॉर असिस्टेंस इन राशन ट्रांसपोर्ट एंड हैंडलिंग-इनकम विद ऑटोमेशन इन पीडीएस’ (सार्थक-पीडीएस) को पांच साल के लिए लागू किया गया है। इससे लाभार्थियों की सटीक पहचान होगी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की ब्रीफिंग में बताया कि इस योजना से 80 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाने वाली पीडीएस स्कीम के लिए काम किया जाएगा। इसके तहत राज्यों के अन्दर खाद्यान्न के मूवमेंट के लिए राज्य सरकारों को सहायता, राशन की दुकानों को सहायता और सार्वजनिक वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण किया जाएगा। पीडीएस में स्वचालन के साथ राशन परिवहन एवं प्रबंधन में सहायता देने वाली योजना अप्रैल, 2026 से मार्च, 2031 तक पांच साल के लिए लागू रहेगी। इसके लिए केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 25,530 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

हर साल बचेंगे 280 करोड़

वैष्णव ने बताया कि इससे खाद्यान्नों के परिवहन समय में 15 से 50 प्रतिशत तक की कमी आएगी और लोगों को अपनी भाषा में समस्याओं के समाधान मिलेंगे। इस योजना से 280 करोड़ रूपए सालाना बचत के साथ ही कार्बन उत्सर्जन में 35 प्रतिशत कमी आने की उम्मीद है। अनाज के बोरों क्यूआर कोड वाले टैग्स और वाहनों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे जिनसे इनकी बेहतर ट्रैकिंग हो सकेगी। साथ ही लाभान्वितों के रजिस्टर को एआई के जरिए विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं से भी मिलाया जाएगा। इससे लाभान्वितों की रियलटाइम जांच भी हो सकेगी। सरकार की ओर से बताया गया है कि इससे योग्य लाभार्थियों की सटीक पहचान हो सकेगी। हालांकि वैष्णव ने कहा कि पात्र अपात्र की जांच एक सतत प्रक्रिया है जो अलग से चलती रहती है।

तीएन एआई मॉड्यूल से ऐसे स्मार्ट होगा पीडीएस

निर्मल- एआई के जरिए रियलटाइम बेनेफिशियरी रजिस्ट्री बनेगी, इसमें मंत्रालयों के बीच लाइव सम्पर्क होगा और विभिन्न योजनाओं के डाटा का समावेशन होगा। आशा- एआई आधारित बहुभाषीय समस्या समाधान और नागरिक सुझाव का प्लेटफॉर्म होगा जो वाट्सएप, आईवीआरएस और चैटबोट के जरिए काम करेगा सक्षम- एआई आधारित सप्लाई चेन प्लेटफार्म होगा जिसमें वाहनों की ट्रैकिंग, क्यूआर ट्रेस, मांग का अनुमान और रास्तों का ऑप्टिमाइजेशन शामिल होगा।