
कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट में एक ऐसे केस की सुनवाई हुई जिसमें एक इंजीनियर को रेप के मामले में जेल में दो साल की सजा काटनी पड़ी। आरोपी विपिन कारपेंटर के खिलाफ इस मामले में आरोप लगाया गया था कि उसने महिला के साथ शादी का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाए और बाद में शादी के लिए मना कर दिया। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। अब आखिरकार अदालत में इंजीनियर को इस मामले में बाइजज्त बरी कर दिया है क्योंकि कोर्ट में लगाए गए आरोप साबित नहीं पाए।
रेप के केस में दो साल जेल में रहने की वजह से आरोपी की पर्सनल और प्रोफेशल दोनों जीवन पर असर पड़ा है। वह रेलवे में इंजीनियर के पद पर कार्यरत था, लेकिन इस मामले की वजह से उसे सस्पेंड कर दिया गया था। दो साल जेल में रहने के बाद अब दिल्ली के हाईकोर्ट ने बरी किया है। आरोपी पक्ष का कहना है कि इस झूठे केस में फंसने की वजह से उसकी इमेज और करियर दोनों पर नकारात्मक असर पड़ा है।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के सामने कई ऐसे तथ्य रखे, जिनसे शिकायतकर्ता के दावों पर सवाल खड़े हुए। वकील ने बताया कि कथित घटना के सात महीनों बाद शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा महिला ने अलग-अलग मौकों पर घटना की तारीखों को लेकर अलग बयान दिए। अदालत ने भी माना कि बयानों में लगातार बदलाव होने से मामले की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे और इन्ही सब कराणों से आरोपों की सही साबित नहीं हो पाए।
मामले में तकनीकी सबूत भी जरूरी साबित हुए। कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच में यह सामने आया कि जिस दिन की घटना बताई गई थी, उस समय महिला आरोपी के बताए गए स्थान के आसपास थी ही नहीं। वहीं महिला ने जो कोर्ट में व्हाट्सऐप चैट्स पेश की थी वह भी जांच में प्रमाणित नहीं हो पाई। पहले जांच एजेंसी को फोन दिया ही नहीं गया और बाद में फोन खो जाने की बात कही।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि महिला कई मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव थी और आरोपी के शादीशुदा होने की जानकारी पहले से रखती थी। बचाव पक्ष का आरोप था कि पैसों को लेकर विवाद के बाद यह मामला दर्ज कराया गया। हालांकि अदालत ने इन दावों पर अलग से टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ मजबूत और भरोसेमंद सबूत पेश नहीं कर पाया। इसी आधार पर आरोपी को बरी कर दिया गया।
अदालत से राहत मिलने के बाद आरोपी पक्ष अब एक और कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि एक निर्दोष व्यक्ति ने दो साल जेल में बिताए, नौकरी खोई और सामाजिक बदनामी झेली। ऐसे में इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा, यह भी बड़ा सवाल है। वकील ने कहा कि वे अदालत में जाकर इस मामले में उचित मुआवजे और न्याय की मांग करेंगे, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़े।
Updated on:
28 May 2026 03:38 pm
Published on:
28 May 2026 03:38 pm
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