
केन्द्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने रविवार को अगरतला में पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों से संवाद किया और उन्हें ऋण राशि के चैक सौंपे।
नई दिल्ली। देश के असंगठित शहरी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों रेहड़ी-पटरी पर व्यवसाय करने वाले छोटे कारोबारियों को आत्मनिर्भरता देने और उन्हें वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना को छह साल हो गए हैं। इन छह साल में इस योजना के तहत पिचहत्तर लाख लोगों को 17 हजार करोड़ रूपए से ज्यादा ऋण दिए गए हैं। इससे डिजीटल लेनदेन को भी बढ़ावा भी मिला है।
जून 2020 में शुरू हुई यह योजना कोविड-19 महामारी के दौरान स्ट्रीट वेंडर्स को राहत देने के उद्देश्य से शुरुआत की थी। आवासन एवं शहरी मामलात मंत्रालय के अनुसार पिछले छह साल में इस योजना से स्ट्रीट वेंडर्स को व्यवसाय के लिए ऋण के साथ ही उनको डिजिटल कारोबार करने में मदद और सामाजिक सुरक्षा भी मिली है। मंत्रालय के अनुसार योजना के तहत अब तक 1.12 करोड़ ऋण वितरित किए गए हैं जिसकी कुल राशि 17,800 करोड़ से अधिक है और 75.5 लाख से अधिक लाभार्थी योजना से जुड़े।
स्वनिधि योजना के चलते सड़क किनारे व अन्य जगहों पर व्यापार करने वाल रेहड़ी, स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल लेन देन करने में मदद मिली। इससे उनके बैंक खाते खुल सके और रिकॉर्ड बन सके। करीब 55 लाख से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर इस योजना के तहत डिजिटल रूप से ऑनबोर्ड हुए जिन्होंने 841 करोड़ डिजिटल लेन-देन किए। जिनकी कीमत लगभग 8.96 लाख करोड़ रही। इस दौरान लाभार्थियों को 800 करोड़ तक की ब्याज सब्सिडी और डिजिटल कैशबैक भी मिला। इस योजना को अब मार्च 2030 तक बढ़ाया गया है। मंत्रालय का दावा है कि इस योजना के तहत लाभार्थियों की औसत आय में 20% वार्षिक की वृद्धि दर्ज की गई।
इस योजना के तहत वेंडर्स को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी के रूप में तीन चरणों में 15, 25, और 50,000 तक का कर्ज मिलता है। वहीं समय पर भुगतान करने वालों को क्रेडिट लिमिट और डिजिटल लेन-देन पर कैशबैक भी मिलता है। इसके तहत लाभार्थियों को आठ केंद्रीय योजनाओं से जोड़ा गया है जिसके चलते उन्हें सामाजिक सुरक्षा भी मिलती है। लगभग 95% लाभार्थियों ने पहली बार औपचारिक संस्थागत ऋण प्राप्त किया। वहीं 30% ने अतिरिक्त लोन हासिल किया, जिससे उनका क्रेडिट स्कोर बढ़ा।
कई शहरों में स्ट्रीट वेंडर्स को स्थायी ठिकाना नहीं मिल पाता है जिसके चलते स्ट्रीट वेंडर्स को स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई को झेलना पड़ता है। वहीं कर्ज की राशि भी बड़े उद्यमों के लिए कम रहती है। उपकरणों और वाहन इत्यादि की लागत कहीं ज्यादा आती है। स्वयं के विभाग के आंकड़ों के अनुसार औसतन 23 दिन में ऋण स्वीकृत होता है, जो तात्कालिक जरूरतों वाले वेंडर्स के लिए लंबा समय है।
-75.5 लाख से अधिक लाभार्थी
-1.12 करोड़ से अधिक ऋण वितरित
-17,800 करोड़ रूपए से अधिक की कुल ऋण राशि
-95% लाभार्थियों को पहली बार कर्ज
-46% महिलाएं लाभार्थी
-70% वंचित समुदायों के लाभार्थी।
-55 लाख से अधिक विक्रेता डिजिटल ऑनबोर्ड
-8.96 लाख करोड़ के 841 करोड़ डिजिटल लेन-देन हुए
-800 करोड़ की ब्याज सब्सिडी और डिजिटल कैशबैक
90 प्रतिशत लोगों ने बिना किसी दबाव के कर्जा वापिस चुकाया है। इससे इनकी क्रेडिट हिस्ट्री बनी है और क्रेडिट स्कोर बनने से इनको सामान्य वित्तीय संस्थानों से लोन मिलने लगा है। इससे पहले ये सूदखोरों के भरोसे थे। दूसरा इनको एक आइडेंटिटि कार्ड मिलने से स्थानीय पुलिस, प्रशासन व अन्य कंपीटिटर की तुलना में अपनी जगह पर कारोबार करने में आसानी हुई है। हालांकि यह प्रॉपर्टी राइट जैसा नहीं है पर पांच हजार लोगों के सर्वे में बहुत से लोगों ने इसका फायदा गिनाया।
-प्रो.प्रसन्न तंत्री, आईएसबी, हैदराबाद
Published on:
01 Jun 2026 11:16 am
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