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शिवामोगा ISIS आतंकी साज़िश केस: एक अभियुक्त के ख़िलाफ़ चार्जशीट, दो अन्य के ख़िलाफ़ बढ़ाई गई धाराएँ

- शिवमोगा ISIS साज़िश केस

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अनुराग मिश्रा

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी एनआइए ने आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए शिवमोगा ISIS साज़िश केस में चार्जशीट दाख़िल की है। एनआइए ने इस मामले में 1 अभियुक्त के ख़िलाफ़ चार्जशीट के साथ दो पहले गिरफ़्तार किए गए अभियुक्तों के ख़िलाफ़ कुछ अन्य धाराएँ भी बढ़ाई है।

ग़ौरतलब है कि शिवामोगा ISIS आतंकी साज़िश केस में अभियुक्तों ने लोगों को बरगलाने के लिए रात के अंधेरे में दीवारों पर आतंकी संगठनों के पक्ष में नारे लिखे थे। अभियुक्तों ने मैंगलोर के सार्वजनिक जगहों के साथ ही लोगों के मकानों पर इस्लामिक स्टेट के साथ-साथ लश्कर -ए -तैयबा और तालिबान के समर्थन में बातें लिखीं। इसके अलावा इन आतंकियों ने युवाओं को जिहाद के लिए भड़काया भी।

अपनी दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने अभियुक्त अराफ़ात अली के ख़िलाफ़ मामला चार्जशीट किया है। इसके अलावा मोहम्मद शारिक और माज मुनीर अहमद नाम के दो अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ और कुछ अन्य धाराएँ लगायी।

अभियुक्त आराफात ने युवाओं को भड़काने के लिए तमाम योजनाएं बताईं बनायी। इसके अलावा उसने मुनीर अहमद को लश्कर ए तैय्यबा, तालिबान और इस्लामिक स्टेट के पक्ष में शहर में प्रचार के लिए दीवारों पर लिखने का काम सौंपा।

अराफ़ात को एनआइए ने साल 2023 के 14 सितंबर को राजधानी दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई-अड्डे से उस समय गिरफ़्तार किया था जब वो केन्या से भारत वापस लौटा था।

इससे पहले एक दूसरे मामले अल हिंदू मॉड्यूल केस में गिरफ़्तारी के डर से अराफ़ात दुबई भाग गया था। इस मामले में उसके दो दूसरे सहयोगी अब्दुल मतीन ताहा और साबिर हुसैन साहजेब भी शामिल थे। ये दोनों भी भगोड़े घोषित किए गए हैं।

एनआइए को जाँच में यह भी पता चला कि अराफ़ात आतंक के पक्ष में लिखने के लिए जो पैसे अपने सहयोगियों को मेहनताने के तौर पर देता था वो उसे उसके आंकाओं द्वारा ऑनलाइन क्रिप्टो करेंसी के तौर पर भेजी जाती थी। जाँच में यह भी पता चला है कि सारे अभियुक्त मिलकर आतंकी है की कोई बड़ी साज़िश रच रहे थे। इनका इरादा सार्वजनिक स्थानों पर दहशत फैलाने का था था।

इस मामले में फ़िलहाल राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने नौ अभियुक्तों के ख़िलाफ़ चार्जशीट पहले ही दाख़िल कर दी है ।