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सरकारी नौकरी छोड़ अध्यात्मिक गुरु बना रेलवे अफसर, अब आईआईटी दिल्ली ने दिया खास सम्मान

Success Story: रेलवे की सरकारी नौकरी छोड़कर अध्यात्मिक गुरु के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले आचार्य प्रशांत को आईआईटी दिल्‍ली ने खास सम्मान से नवाजा है। आइए डिटेल में जानते हैं पूरी स्टोरी…

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Success Story: सरकारी नौकरी छोड़ अध्यात्मिक गुरु बना रेलवे अफसर, अब आईआईटी दिल्ली ने दिया खास सम्मान

Success Story: सरकारी नौकरी छोड़ अध्यात्मिक गुरु बना रेलवे अफसर, अब आईआईटी दिल्ली ने दिया खास सम्मान

Success Story: आध्यात्मिक गुरु, लेखक और समाज सुधारक के रूप में प्रसिद्ध आचार्य प्रशांत को आईआईटी दिल्ली ने एक विशेष सम्मान (OCND) से नवाजा है। उन्हें 'राष्ट्रीय विकास में उत्कृष्ट योगदान' (Outstanding Contribution to National Development) पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। शनिवार को आईआईटी दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में आचार्य प्रशांत को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। इस सम्मान के जरिए आधुनिक समाज के लिए राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा देने और परिवर्तनकारी आध्यात्मिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने में उनके प्रयासों को सराहा गया।

कौन हैं आचार्य प्रशांत, जिन्हें आईआईटी दिल्ली ने दिया सम्मान?

आईआईटी दिल्ली एलुमनाई एसोसिएशन ने आचार्य प्रशांत की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि वे कालजयी आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और समकालीन प्रासंगिकता का एक दुर्लभ संगम प्रस्तुत करते हैं। उनका कार्य न केवल व्यक्तिगत जीवन को दिशा दे रहा है बल्कि राष्ट्रीय चेतना के ताने-बाने को भी मजबूत कर रहा है। आचार्य प्रशांत प्रसिद्ध वेदांत शिक्षक, लेखक और 'प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन' के संस्थापक हैं। अब तक उन्होंने 160 से अधिक किताबें लिखी हैं। जिनमें जीवन, अध्यात्म और आत्म-साक्षात्कार पर आधारित गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं। वे आंतरिक परिवर्तन को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने वाली कई पहलों का नेतृत्व कर रहे हैं।

आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र हैं आचार्य प्रशांत

आचार्य प्रशांत का शैक्षणिक और पेशेवर जीवन भी बेहद प्रेरणादायक रहा है। वे आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और इसके बाद उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से भी पढ़ाई की। करियर की शुरुआत में उन्होंने भारतीय रेलवे में पर्सनल ऑफिसर के रूप में प्रशासनिक सेवा निभाई, लेकिन बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और जीवन को अध्यात्म और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। अब समाज को बेहतर बनाने और युवाओं की मदद करने में लगे हुए हैं। आचार्य प्रशांत नाम के यह व्यक्ति 'अद्वैत लाइफ-एजुकेशन' और 'प्रशान्त अद्वैत फाउंडेशन' नाम के संगठन चला रहे हैं। पिछले 15 सालों में उन्होंने यूट्यूब और फेसबुक जैसे इंटरनेट के माध्यम से भारत और दूसरे देशों के करोड़ों लोगों को अध्यात्म से जोड़ा है।

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वैश्विक मंच पर पहचान

आचार्य प्रशांत की शिक्षाएं सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। बल्कि दुनियाभर के प्रमुख संस्थानों जैसे आईआईटी, आईआईएम, एम्स, और यूसी बर्कले तक भी पहुंच चुकी हैं। उन्होंने प्राचीन भारतीय दर्शन को आधुनिक वैश्विक चुनौतियों से जोड़ने का प्रयास किया है। उनके कार्य ने clarity (स्पष्टता), compassion (करुणा) और self-education (स्व-शिक्षा) को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उनकी प्रमुख पहलों में 'भगवद गीता शिक्षण कार्यक्रम' उल्लेखनीय है, जिसने अब तक एक लाख से अधिक प्रतिभागियों को आकर्षित किया है। हाल ही में उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी गीता आधारित ऑनलाइन परीक्षा का सफल आयोजन भी किया है। जिसने युवाओं में अध्यात्म के प्रति रुचि को बढ़ावा दिया।

सोशल मीडिया पर लंबी चौड़ी फैन फॉलोइंग

डिजिटल युग में भी आचार्य प्रशांत की लोकप्रियता कम नहीं है। यूट्यूब पर उनके 5.61 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर हैं और फेसबुक पर 13 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनके वीडियो लाखों-करोड़ों व्यूज प्राप्त करते हैं, जो उनकी गहरी पकड़ और प्रभाव का प्रमाण हैं। सोशल मीडिया के जरिए वे भारत ही नहीं, दुनिया भर में करोड़ों लोगों तक भारतीय अध्यात्म का संदेश पहुँचा रहे हैं। पिछले 15 वर्षों में उन्होंने यूट्यूब, फेसबुक और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से व्यापक स्तर पर शिक्षा और जागरूकता का कार्य किया है।