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कभी हरा-भरा था सहारा मरुस्थल, रहता था गुमनाम मानव वंश

शोध में खुलासा : दुनिया की सबसे पुरानी दो प्राकृतिक ममियों के डीएनए का विश्लेषण

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बर्लिन. ग्यारह देशों में फैले सहारा रेगिस्तान में करीब 5,000 साल पहले पानी भी था और ताकरकोरी इंसानों का रहस्यमय वंश भी। दुनिया की सबसे पुरानी दो प्राकृतिक ममियों से यह राज खुला है। एक शोध में वैज्ञानिकों ने दावा किया कि आकार में अमरीका और चीन के बराबर सहारा कभी रेगिस्तान के बदले हरा-भरा घास का मैदान था। अब इसे जमीन पर सबसे रूखे इलाकों में गिना जाता है।द नेचर जर्नल में छपे शोध के मुताबिक जर्मनी के माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर इवोल्यूशनरी एंथ्रोपॉलजी के वैज्ञानिकों को दक्षिण पश्चिमी लीबिया के ताकरकोरी इलाके में दो महिलाओं का 7,000 साल पुराना डीएनए मिला। यह चट्टानी जमीन के नीचे दबे अवशेषों में था। प्राकृतिक रूप से दोनों शव ममी बन चुके थे। डीएनए ममी में मौजूद हड्डियों से जुटाया गया। डीएनए विश्लेषण के बाद वैज्ञानिकों ने दावा किया कि उस वक्त हरे-भरे सहारा में रहने वाली दोनों महिलाएं अनुवांशिक रूप से बाहरी दुनिया से काफी अलग थीं।

हजारों साल दूसरों से रहे अलग-थलग

शोध के मुख्य लेखक योहानस क्राउस का कहना है कि उस वक्त ताकरकोरी सूखा मरुस्थल नहीं था। जीनोम विश्लेषण से पता चला कि ताकरकोरी लोग गुमनाम मानव वंश का हिस्सा थे। वे हजारों साल तक उप-सहारा और यूरेशियन मानव वंशों से अलग रहे। वे पशुपालक थे। साइट से पत्थर, लकड़ी और जानवरों की हड्डियों से बने औजार, मिट्टी के बर्तन, बुनी हुई टोकरी और नक्काशीदार मूर्तियां भी मिली हैं।

उत्तरी अफ्रीका मूल का रहा होगा वंश

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इन दो ताकरकोरी महिलाओं का वंश उत्तरी अफ्रीका के किसी इंसानी समुदाय से करीब 50,000 पहले अलग हुआ। यह वही कालखंड है, जब कुछ मानव वंश अफ्रीकी महाद्वीप से बाहर फैलते हुए मध्य पूर्व, यूरोप और एशिया की ओर जा रहे थे। बाद में यही लोग अफ्रीका के बाहर इंसानों के पूर्वज बने। ताकरकोरी वंश अपेक्षा से अधिक समय तक बाकी समूहों से अलग रहा।


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