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प्राकृतिक तरीके से इंसानों का इलाज कर रहे हैं ये कीड़े, साइड इफेक्ट का नहीं कोई खतरा

आज आपको इलाज के कुछ प्राकृतिक तरीके के बारे में बताएंगे, जिन्हें कई देशों में न सिर्फ इस्तेमाल किया जाता है बल्कि इससे साइड इफैक्ट का खतरा भी बेहद कम होता है।

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कीड़ों से इंसानों का इलाज

कीड़ों से इंसानों का इलाज

नई दिल्ली। मौजूदा दौर में मॉर्डन साइंस बहुत तरक्की कर चुका है। इससे लगभग हर बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन कुछ लोगों को विभिन्न बीमारियों के इलाज में इस पद्धति का इस्तेमाल करने पर कुछ साइड इफेक्ट से भी गुजरना पड़ता है। कई बार यह बहुत पीड़ादायक होता है और इससे लोगों के दिमाग (मानसिक तनाव) पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में आज आपको इलाज के कुछ प्राकृतिक तरीके के बारे में बताएंगे, जिन्हें कई देशों में न सिर्फ इस्तेमाल किया जाता है बल्कि इससे साइड इफैक्ट का खतरा भी बेहद कम होता है।

अगर हम इलाज के लिए प्राकृतिक तरीकों की बात करें तो कई ऐसे कीड़ें हैं जो कई गंभीर बीमारियों के इलाज में मददगार साबित होते हैं। बता दें कि कीड़ों से संक्रमित घाव को ठीक करने, खून का संचार दुरुस्त करने सहित कई चीजों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

जोंक है बहुत काम की चीज
आमतौर पर जोंक तालाब, नदी के किनारे या बहुत ज्याता नमी वाली जगहों पर पाई जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि जोंक का इस्तेमाल त्वचा की बीमारियों और रक्त प्रवाह को दुरुस्त करने के लिए किया जाता है। दरअसल, जब चोट के कारण किसी बाहरी अंग में खून की सप्लाई बंद हो जाए तो जोंक बहुत काम आती है। जोंक में खून को खींचने की ताकत होती है। इसके साथ ही जोंक की लार खून का थक्का भी नहीं बनने देती है।

मछलियों से दमा का इलाज
जोंक के बाद अब बात करते हैं मछलियों की। इलाज में मछलियों को इस्तेमाल कई जगहों पर होता है। दक्षिण भारत में जिंदा मछली खिलाकर दमे का इलाज किया जाता है। इसके अलावा कुछ जगहों पर पैरों के रोगों से लड़ने के लिए गारा रुफा नाम की एक विशेष मछलियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा हाथ और पैरों से डेड स्किन को निकालने के लिए भी मछलियों की मदद ली जाती है। खास बात यह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।

संक्रमित घाव को ठीक करता है ये कीड़ा

पिनवर्म कहे जाने वाले इन कीड़ों के भीतर बहुत छोटे परजीवी होते हैं। पिन के बराबर लंबे पिनवर्मों का इस्तेमाल बैक्टीरिया से संक्रमित घाव को ठीक करने में किया जाता है, लेकिन इस्तेमाल से पहले इन कीड़ों को डिसइंफेक्ट करना जरूरी होता है।

रोग प्रतिरोधी तंत्र की बीमारियों से बचाता है व्हिपवर्म

सांप सा दिखने वाला व्हिपवर्म करीब पांच सेंटीमीटर लंबा होता है। आम तौर पर इसके डंक से इंसान बीमार हो जाता है या उसे तेज दर्द होता है, लेकिन डॉक्टरों की निगरानी में इस कीड़े का इस्तेमाल रोग प्रतिरोधी तंत्र की बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है।

स्वच्छ हवा जरूरी है

बढ़ती गाड़ियों और पेड़ों की कटाई जैसी घटनाओं से लोगों में सांस की समस्या आम बन गई है। सांस की बीमारियों का इलाज स्वच्छ हवा से किया जाता है। ऐसे मरीजों के लिए पहाड़ों और समुद्र तट की हवा लाभदायक साबित होती है। वहीं चिकित्सकों का भी कहना है कि स्वच्छ हवा नाक में नमी बरकरार रखने में मदद करती है।

खूबसूरत लेवेंडर से गहरी नींद
आमतौर पर हल्के बैंगनी फूल वाले लेवेंडर पौधे का इस्तेमाल सिर्फ साबुन या परफ्यूम में ही किया जाता है। इसके अलावा भी लेवेंडर का पौधा बहुत काम की चीज है। इस पौधे से वीसीएस निकाला जाता है। यह सिर, गले और छाती के दर्द में बड़ा आराम पहुंचाता है। वहीं लेवेंडर का इस्तेमाल अनिद्रा को ठीक करने में भी किया जाता है।

मिट्टी से सेहत
गंधक वाले गर्म कुंड या मिट्टी का इस्तेमाल त्वचा की सेहत के लिए किया जाता है। भारत समेत कई देशों में उबटन इसी का उदाहरण है। मिट्टी जोड़ों के दर्द और त्वचा की रघड़ में भी आराम देती है।

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