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‘उसे नहीं पता कि उसका पूरा परिवार खत्म हो चुका है’: दिल्ली के ‘बदले की आग’ में बची अकेली लड़की जिंदगी की जंग लड़ रही है

Tughlaqabad Building Fire: दिल्ली के तुगलकाबाद में एक शख्स से बदला लेने के लिए लगाई गई आग ने हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। इस भीषण अग्निकांड में परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 साल की मानी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। जानिए कैसे दिल्ली पुलिस ने इस खौफनाक साजिश का पर्दाफाश किया।

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Tughlakabad fire conspiracy news

photo ani

Tughlaqabad Building Fire: साउथ-ईस्ट दिल्ली की तुगलकाबाद इलाके में 13 जून की रात करीब 2:15 बजे एक पांच मंजिला इमारत की चौथी मंजिल पर 5 लोगों का एक परिवार गहरी नींद में सोया हुआ था। उन्होंने कभी जीवन में सोचा भी नहीं होगा कि उनकी मौत इस तरह हो जाएगी। सुकून से सो रहा पूरा परिवार चंद सेकंड में तबाह हो गया। सुबह होते-होते पूरा परिवार अस्पताल पहुंच चुका था और महज तीन दिनों के अंदर, उस घर का सिर्फ एक ही सदस्य जिंदा बचा। इसके बाद जब पुलिस ने इस मामले की पड़ताल की तो सामने आया ये महज कोई हादसा नहीं बल्कि एक सोची समझी साजिश है।

कौन है ये पांच लोग

28 साल का पंकज कुमार पांडेय अपनी मां गुड्डी 50, बहनों सोनी (24) व मानी (21) और अपनी नानी सुशीला देवी (70) के साथ इस फ्लैट में रहता था। पंकज की मोबाइल की दुकान थी। दो साल पहले पिता की बीमारी से मौत के बाद, पंकज ने पूरे परिवार को एक बेहतर जिंदगी देने के लिए यह फ्लैट खरीदा था। लेकिन किसे पता था कि यह नया आशियाना ही उनके लिए काल बन जाएगा।

पार्किंग से उठी लपटें और मच गई चीख-पुकार

उस रात चुपचाप से आए एक शख्स ने बिल्डिंग की ग्राउंड फ्लोर पार्किंग में खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी। देखते ही देखते करीब 8 दोपहिया वाहन धूं-धूं कर जलने लगे। आग की लपटें और जहरीला धुआं तेजी से ऊपर की मंजिलों की तरफ बढ़ा। बिल्डिंग में भगदड़ मच गई। पुलिस और फायर ब्रिगेड ने किसी तरह 10 लोगों को बाहर निकाला, जिनमें से पंकज का पूरा परिवार बुरी तरह झुलस चुका था।

तीन दिन में उजड़ गई दुनिया

अस्पताल पहुंचते ही इलाज के दौरान सबसे पहले पंकज, उसकी नानी सुशीला और बहन सोनी ने दम तोड़ दिया। इसके दो दिन बाद 15 जून को मां गुड्डी भी सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी वो दोनों भी दम तोड़ दिया।
अब इस परिवार में सिर्फ सबसे छोटी बहन मानी जिसकी उम्र 21साल है वही बची है, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रही है और इस वक्त वेंटिलेटर पर है।

'उसे कैसे बताएंगे कि अब कोई नहीं रहा?'

मानी के चचेरे भाई विवेक और आनंद ने रोते हुए बताया कि मानी को अभी तक यह भी नहीं पता कि उसकी मां, भाई, बहन और नानी अब इस दुनिया में नहीं हैं। जब उसे होश आएगा, तो हम उसे यह सच कैसे बताएंगे? रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे सोच रहे हैं कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद यह अकेली बच्ची अब कहां जाएगी।