
प्रतीकात्मक तस्वीर
Delhi Health Insurance Claim Case: दिल्ली के एक व्यक्ति को पत्नी के निधन के बाद हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। जानकारी के अनुसार पत्नी के इलाज के लिए 3 लाख से ज्यादा खर्च हुए थे लेकिन फिर भी बीमा कंपनी ने केवल 91 हजार रुपये का भुगतान किया और बाकी के पैसे अलग-अलग नियमों का हवाला देकर काट लिए। इससे परेशान होकर पति को व्यक्ति ने कंज्यूमर कमीशन का रुख करना पड़ा। मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने कंपनी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया और बका राशि के साथ मुआवजा और कानूनी खर्च भी देने के आदेश दिए।
प्रवाश मोहंती और उनकी पत्नी के नाम पर फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी थी, जो अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक लागू थी। इस पॉलिसी में 3 लाख रुपये तक का बीमा कवर था। मोहंती का कहना था कि उन्होंने कंपनी की सभी शर्तों का पालन किया और इलाज से जुड़े सभी जरूरी कागजात भी जमा कराए। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने पूरा क्लेम पास नहीं किया।
साल 2020 में मोहंती की पत्नी अपने गृह नगर भुवनेश्वर गई थीं। इसी दौरान उनकी तबीयत खराब हो गई और 20 जून को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कुछ दिनों तक इलाज चलने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ, इसलिए उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया। वहां भी कई दिनों तक इलाज चला, लेकिन उनकी सेहत लगातार बिगड़ती रही। आखिरकार 17 जुलाई 2020 को उनका निधन हो गया। दोनों अस्पतालों में इलाज पर कुल 3 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च आया।
मोहंती के अनुसार, पत्नी के इलाज में कुल 3.08 लाख रुपये खर्च हुए थे, लेकिन बीमा कंपनी ने सिर्फ करीब 91 हजार रुपये ही लौटाए। बाकी रकम अलग-अलग कटौतियों का हवाला देकर रोक ली गई। उन्होंने कई बार कंपनी से संपर्क कर बाकी पैसे की मांग की, लेकिन कोई सही जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई और बकाया राशि के साथ मुआवजे की मांग की।
मामले की सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने कहा कि क्लेम का निपटारा पॉलिसी के नियमों के अनुसार किया गया था। कंपनी का कहना था कि जिस अस्पताल में इलाज कराया गया, वह उनके प्रेफर्ड प्रोवाइडर नेटवर्क (PPN) में शामिल नहीं था। कंपनी ने दलील दी कि उस इलाके में नेटवर्क अस्पताल उपलब्ध थे, इसलिए नियमों के तहत कुछ रकम की कटौती की गई। कंपनी ने अपने फैसले को पूरी तरह सही बताया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने माना कि बीमा कंपनी अपनी कटौती को सही तरीके से साबित नहीं कर सकी। आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता को क्लेम का उचित लाभ मिलना चाहिए था। इसके बाद कंपनी को 1,65,266 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया। साथ ही शिकायत दर्ज होने की तारीख से 9 प्रतिशत सालाना ब्याज, 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये कानूनी खर्च भी देने के निर्देश दिए गए।
Published on:
18 Jun 2026 11:40 am
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