
शादाब अहमद
नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने लोकसभा चुनाव में राम मंदिर के मुद्दा उठाने और कांग्रेस को राम विरोधी करार देने का करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि हम राम के पुजारी है, जबकि वो राम के व्यापारी है। इसके साथ ही सवाल भी किया कि मेरा तो नाम ही ‘जयराम रमेश’ है, जिसके दोनों नाम में राम है। जयराम रमेश से बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल: पीएम मोदी ने कांग्रेस पर राम मंदिर को काल्पनिक बताने का आरोप लगाए हैं। क्या कहेंगे?
जवाब: यह बिल्कुल गलत है। हम राम के पुजारी है, वो राम के व्यापारी है। मैं व्यक्तिगत तौर पर कह सकता हूं कि हिन्दुस्तान का शायद मैं अकेला व्यक्ति हूं, जिसके पहले नाम में भी राम है और दूसरे नाम में भी राम है। यह देखिए (कमरे में धार्मिक किताबें) कौन सी किताबें रखी है। इसका मैं दिखावा नहीं करता। पीएम महंगाई, बेरोजगारी, एमएसपी, संधिवान पर हमले, चीन सीमा जैसे विवाद पर चुप्पी साधें हैं। सिर्फ जनता के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दे उठाते हैं। यह ध्यान हटाने के मास्टर है।
सवाल: कांग्रेस के खातों के लेकर आईटी की ओर से कहा जा रहा है कि कार्रवाई नियमों के तहत हुई है
राजनीतिक दल पर कभी टैक्स नहीं लगता है। भाजपा तो नहीं दे रही है। यह उत्पीडऩ की राजनीति है। जिस आधार पर हमारे पर टैक्स लगाया है, उसी आधार पर भाजपा पर 6 हजार करोड़ का टैक्स लगाना चाहिए। भाजपा की कोशिश है कि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को अपंग किया जाए और बहुत भारी तरीके से प्रचार से रोका जाए। हम अखबार, टीवी, डिजिटल, रेडियो पर प्रचार तो कर रहे हैं, लेकिन ज्यादा नहीं कर पाए हैं। हमारे 300 करोड़ रुपए की चोरी की जा चुकी है। हमने सुप्रीम कोर्ट ने दरवाजा खटखटाया है। किसी भी डायरी का कागज निकाल कर केस चलाना ठीक नहीं है, वो फर्जी भी तो सकती है। यदि ऐसा है तो जैन हवाला डायरी, सहारा-बिरला डायरी क्यों नहीं लेते।
सवाल: कांग्रेस का न्याय संकल्प पत्र जारी हो चुका है? क्या यह लोकसभा जीत दिलाने का मंत्र है
जवाब: यह न्याय पत्र है। इसका संकल्प है कि हम हमारी न्याय गारंटी को पूरा करेंगे। जिस तरह से कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश में चुनाव से पहले गारंटी दी, जिसे सरकार बनने के बाद लागू कर दिया है। राजस्थान में भी हमने गारंटी योजना लागू की थी, लेकिन जनादेश नहीं मिला था। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी और राहुल गांधी जी ने जनता के सामने पांच न्याय रखे। युवा न्याय, नारी न्याय, किसान न्याय, श्रमिक न्याय और हिस्सेदारी न्याय के तहत 25 गारंटियां रखी। एक तरह से यह हमारी चुनावी रणनीति है, जिसके आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं।
सवाल: पार्टी ने ढेरों वादे किए हैं, गरीब परिवार को एक लाख रुपए देने, युवाओं के स्टाइपेंड का वादा है। यह कैसे पूरे होंगे, जबकि देश में कर्ज लगातार बढ़ता रहा है।
जवाब: यह हमने लागू कर दिखाए हैं। महालक्ष्मी गारंटी जैसी योजनाओं को हमने कर्नाटक में लागू कर दिखाया है। पिछले चार-पांच महीनों में तेलंगाना में लागू कर दिखाया है। उसके अनुभव के आधार पर यह गारंटियां दी गई है। यह फर्जी गारंटी या जुमले नहीं है। फंडिग की कोई दिक्कत नहीं है।
सवाल: भूमिहीन को जमीन देने का वादा कैसे पूरा करेंगे?
जवाब: भूमि सुधार अधूरा है। हमारे देश की वास्तविकता यह है कि 8 फीसदी की जीडीपी दर होने के बावजूद करोड़ों परिवारों के पास भूमि नहीं है। भूमिहीन परिवारों को राहत दिलाना जरूरी है। मेरे ग्रामीण विकास मंत्री रहते हुए अधिग्रहण कानून बनाया गया, जो एक क्रांतिकारी कदम था। इसके तहत अधिग्रहित भूमि के मालिक के साथ भूमिहीन परिवारों को मुआवजा देने का प्रावधान किया गया था।
सवाल: सहयोगी दलों से सीट बंटवारे पर संजय निरुपम जैसे नेता नाराज हो गए?
जवाब: देखिए, अनुशासन जरूरी है और पार्टी सर्वोपरि है। हम लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां हर किसी को अपने विचार रखने की आजादी है। विशेषता है कि पार्टी फोरम के अलावा मीडिया के माध्यम से भी विचार रखे जाते हैं। मेरा यह मानना है कि हर चीज की एक लक्ष्मण रेखा होती है। पार्टी ने कोई निर्णय किया, उस निर्णय का पालन करना कर्तव्य बनता है। कई बार मेरे विचार पार्टी के निर्णय से अलग हो सकते हैं, लेकिन पार्टी अध्यक्ष या सीडब्ल्यूसी ने कोई निर्णय किया है तो उसको मानना हमारी पवित्र जिम्मेदारी होती है। अगर ऐसा नहीं होगा तो अराजकता का माहौल बन जाएगा। संजय निरूपम मेरे अच्छे मित्र है, लेकिन आखिरी पांच-छह दिनों में लक्ष्मण रेखा को पार किया। उन्हें क्या नहीं मिला।
Published on:
06 Apr 2024 05:03 pm
बड़ी खबरें
View Allनई दिल्ली
दिल्ली न्यूज़
ट्रेंडिंग
