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World No Tobacco Day: तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन से युवा हो रहे शिकार

विशेषज्ञों और Celebrities ने दुकानों (Point of Sales) और फिल्मों में विज्ञापन रोकने के लिए सख्त कानून की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय पहलवान संग्राम सिंह (International wrestler Sangram Singh) ने कहा कि युवाओं के सामने रोजाना तंबाकू के विज्ञापन किए जा रहे हैं। मुनाफे के लिए इनके संवेदनशील दिमागों को निशाना बनाया जा रहा है।

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World No Tobacco Day: तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन से युवा हो रहे शिकार

World No Tobacco Day: तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन से युवा हो रहे शिकार

विज्ञापनों और मनोरंजन के माध्यम से तंबाकू कंपनियां युवाओं और बच्चों को अपने उत्पादों के इस्तेमाल के लिए लुभा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मशहूर हस्तियों ने इन जानलेवा उत्पादों के दुकानों (Point of sales) पर होने वाले विज्ञापन सहित सभी तरह के सीधे और परोक्ष विज्ञापन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।विश्व प्रसिद्ध पहलवान और अभिनेता संग्राम सिंह ने कहा है कि तंबाकू उत्पादों का व्यापक स्तर पर हो रहा सीधा और परोक्ष विज्ञापन एक बड़ा खतरा है। इससे बच्चे धूम्रपान के लिए प्रेरित होते हैं और जीवन भर के लिए उनमें इसकी लत लगने की संभावना विकसित होती है। तंबाकू सेवन उनकी मौत का कारण बन सकती है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) पर यहां Tobacco Free India (टोबैको फ्री इंडिया) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।

उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि तंबाकू के विज्ञापनों पर प्रतिबंध के बावजूद, तंबाकू कंपनियां विभिन्न मार्केटिंग रणनीति के जरिये अपने उत्पादों के प्रचार पर भारी मात्रा में खर्च कर रही हैं। यहां तक कि वे कानून की कमी का फायदा उठा कर दुकानों पर तंबाकू उत्पादों का खुले आम विज्ञापन लगाते हैं। उन्होंने कहा, ''तंबाकू कंपनियों को पता है कि युवाओं को लत लग गई तो वे उनके आजीवन ग्राहक होंगे। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि तंबाकू उत्पादों के हर तरह के विज्ञापनों को तुरंत प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।”

हर साल 13 लाख मौतें
तंबाकू इस्तेमाल से होने वाली मौतों के आंकड़े बड़े भयावह हैं। भारत में 13 लाख सालाना मौतें इसकी वजह से होती हैं। हमारे देश में 37.9 फीसदी बच्चे 10 वर्ष की उम्र में तंबाकू का इस्तेमाल करने लगते हैं।

तंबाकू-नियंत्रण कानून कॉटपा 2003 में तंबाकू से संबंधित विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन तंबाकू कंपनियां पॉइंट ऑफ सेल यानी तंबाकू उत्पाद बेचने वाले दुकानों पर विज्ञापनों और उत्पाद प्रदर्शन के प्रावधानों का दुरुपयोग करके कानून की खामियों का फायदा उठाती हैं दुकानों पर विज्ञापन लगाते हैं। भारत में हर दिन लगभग 5,500 युवा तंबाकू की आदत शुरू कर रहे हैं।

यह महामारी को है न्यौताः चंद्रकांत लहरिया

प्रख्यात लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञ चंद्रकांत लहरिया कहते हैं कि दुकानों पर विज्ञानप इसलिए भी प्रतिबंधित होने चाहिएं, क्योंकि तंबाकू इस्तेमाल नहीं करने वाले लोग और बच्चे भी इन दुकानों पर जाते हैं और उन्हें इसकी लत लगने का खतरा होता है। प्वाइंट ऑफ सेल पर तंबाकू उत्पादों के प्रदर्शन की छूट तंबाकू महामारी को आमंत्रित करने जैसा है। उन्होंने कोविड-19 के मद्देनजर लोगों के स्वास्थ्य पर तंबाकू के खतरे के बारे में सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया कि कैसे तंबाकू का इस्तेमाल करने वाले लोग महामारी के दौरान घातक संक्रमण की चपेट में आ गए।

उन्होंने इस बात की मांग की कि हवाई अड्डों, होटलों और रेस्त्राओं में बने स्मोकिंग जोन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। इसकी वजह से धूम्रपान नहीं करने वालों की सेहत पर भी खतरा होता है।

मोदी ने ई-सिगरेट पर बैन कर युवाओं को बचाया

ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के सीईओ अखिलेश मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तंबाकू के सेवन से उत्पन्न खतरे के प्रति गंभीरता दिखाई है। उन्होंने कहा, "उनकी पहल के कारण सरकार ने ई-सिगरेट पर समय पर प्रतिबंध लगाकर अपने युवाओं को बचाया है।" उन्होंने बताया कि अब सरकार ने तंबाकू के खतरे को रोकने के लिए कोटपा को मजबूत करने की पहल करते हुए इसमें पर्याप्त संशोधन करने का एक और सराहनीय कदम उठाया है।

नशे की लत यहीं से होती है शुरूः डॉ. उमा

एम्स नई दिल्ली के रुमेटोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. उमा कुमार ने कहा, "सिगरेट और गुटखा जैसे उत्पाद बनाने वाली तंबाकू कंपनियां किशोरों और बच्चों को विशेष रूप से निशाना बना रही हैं। वे अपने विज्ञापनों को स्कूल और कॉलेजों के पास प्रमुखता से प्रदर्शित करती हैं ताकि इन संवेदनशील दिमागों को प्रभावित किया जा सके। इन्हें पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।" उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं को नशे की लत वाले इन उत्पादों से बचाना बहुत जरूरी है।

पब्लिक प्लेस सौ फीसदी तंबाकू-मुक्त हों

डॉ. कुमार ने पेसिव स्मोकिंग के खतरों से भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा खतरा महिलाओं और बच्चों को होता है। उन्होंने कहा, "डीएसए (डेजिगनेटेड स्मोकिंग एरिया यानी धूम्रपान वाले इलाके) को खत्म करना स्वास्थ्य की दिशा में एक गेम चेंजर सबित हो सकता है। साथ ही भारत के सार्वजनिक स्थलों को 100 प्रतिशत धूम्रपान मुक्त बना सकता। तंबाकू उत्पाद कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के कारण बनते हैं। इससे देश में लगभग 13 लाख लोगों की जान जाती है। स्वस्थ भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि तंबाकू नियंत्रण कानून और नीतियों को मजबूत बनाया जाए और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।"

सरकार जल्द ला सकती है सख्त कानून

इस कार्यक्रम में संचार विशेषज्ञ नीलकांत बख्शी ने केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न तंबाकू निरोधी उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों, खासकर युवाओं के स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "उन्होंने ही योग को दुनिया भर में एक जन आंदोलन बनाया। मुझे यकीन है कि वे लोगों पर तंबाकू के बुरे प्रभाव के बारे में भी जानते हैं। सरकार निश्चित रूप से जल्द या बाद में इन कैंसर जनित उत्पादों से होने वाले खतरे को रोकने के लिए कानून लाएगी।”