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अमरीका के संग्रहालय में मिली कांचीपुरम एकाम्बरेश्वर मंदिर की 18वीं सदी की मूर्ति

Tamilnadu Idol

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चेन्नई. आइडल विंग की चोरी-रोधी इकाई को अमरीका के सैन फ्रांसिस्को एशियाई कला संग्रहालय में कांचीपुरम एकाम्बरेश्वर मंदिर की सोमस्कंदर की प्राचीन धातु मूर्ति मिली है। इस मूर्ति की कीमत करीब आठ करोड़ रुपए आंकी गई है। विविध उपायों से मूर्ति को वापस तमिलनाडु ला दिया गया है।

इस संबंध में जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि तमिलनाडु मूर्ति चोरी रोकथाम इकाई के प्रमुख आर. दिनकरन, पुलिस अधीक्षक आर. शिवकुमार की देखरेख में कई विशेष बलों का गठन किया गया और उन्हें यह पता लगाने का निर्देश दिया गया कि क्या तमिलनाडु से संबंधित किसी भी मूर्ति की तस्करी की गई है और उनको विदेशों में निजी विक्रेताओं द्वारा संचालित संग्रहालयों और संग्रहालयों की वेबसाइटों पर प्रदर्शनी के रूप में रखा गया है।
इंटरनेट पर खोजा

इंटरनेट के माध्यम से तलाशने पर नॉर्थ जोन आइडल थेफ्ट स्क्वाड की पुलिस इंस्पेक्टर तमिलसेल्वी को अमरीका के सैन फ्रांसिस्को एशियन आर्ट म्यूजियम में प्रदर्शित सोमस्कंदर की एक धातु की मूर्ति दिखी। संग्रहालय प्रबंधन ने वेबसाइट पर बताया कि यह मूर्ति कांचीपुरम एकाम्बरेश्वर मंदिर की है। यह 1500 से 1800 सदी के बीच की है और कांस्य से बनी है। साथ ही मूर्ति के आसन के सामने दानकर्ता का नाम (उनके पिता और दादा का नाम) तेलुगु में उकेरा गया है। उस पर यह भी अंकित है कि यह मूर्ति कांचीपुरम के एकाम्बरेश्वर (एकंबरनाथ) के मंदिर के लिए बनाई गई थी।

पुलिस की गहन जांच
मूर्ति के आसन पर तेलुगु में चार पंक्तियां अंकित हैं। जब शिलालेख विशेषज्ञों की मदद से इसका अनुवाद किया गया तो यह पुष्टि हो गई कि सोमस्कंदर की उपरोक्त मूर्ति कांचीपुरम एकाम्बरेश्वर मंदिर की है। तेलुगू भाषा में लिखा है कि 'थोंडई मंडल के वेंकटरामनयनी टी.पी. वेल्लाकोंडामा नयनी टी.पी. द्वारा एकंबरेश्वर मंदिर को ग्यारह मूर्तियां उपहार में दी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मूर्ति की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग आठ करोड़ रुपए है और इस मूर्ति की संरचना और शिलालेखों से पता चलता है कि यह मूर्ति 18वीं शताब्दी की है।

अमरीका से लाए मूर्ति

मूर्ति को अज्ञात अपराधियों ने कांचीपुरम के मंदिर से चुरा लिया था और फिर अंतरराष्ट्रीय तस्करों की मदद से अमरीका के कला संग्रहालय को बेच दिया था। चोरी की औपचारिक शिकायत दर्ज होने के बाद जांच पड़ताल में पुलिस को इसे खोजने में कामयाबी मिली। कूटनीतिक उपायों के जरिए इस मूर्ति को तमिलनाडु वापस लाया गया है।

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