भीलवाड़ा। जिला एवं सेशन न्यायालय के मांग के अनुरूप 50 बीघा जमीन नहीं मिलने से सांगानेर में नई जिला कोर्ट के लिए आवंटित 18 बीघा भूमि वीरान पड़ी है।
न्यायालयों की बढ़ती संख्या के अनुरूप कोर्ट परिसर में जमीन की कमी से कई न्यायालय किराए के भवनों में चल रहे हैं। कुछ कोर्ट रूम जर्जर भवन में संचालित है। हालात यह हैं कि शहर के मध्य पार्किंग समस्या बढ़ गई है। कोर्ट, वकील एवं पक्षकार परेशान हैं। 18 बीघा आवंटित जमीन भी कोर्ट, वकील और पक्षकारों को राहत नहीं दे पा रही है।
जिला एवं सेशन न्यायालय भवन शहर के मध्य कलक्ट्रेट के समीप घनी आबादी क्षेत्र में है। गत दो दशक में जिला एवं सेशन न्यायालय के अधीन कई नए न्यायालय खुले, लेकिन अदालतों की संख्या के अनुपात में यहां जमीन एवं सुविधा नहीं है। मौजूदा न्यायालय परिसर छोटा पड़ने लगा है। न्यायालयों के साथ पक्षकार एवं वकीलों की संख्या में भी कई गुना वृदि्ध हुई है। ऐसे में पार्किंग की समस्या बढ़ी है। कोर्ट चौराहे से लेकर कलक्ट्रेट रोड पर वाहनों की कतार नजर आने लगी है। वकीलों को भी कोर्ट में आरामदायक स्थल नहीं मिल पा रहे हैं।
जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने विभिन्न न्यायालयों के लिए एवं आगामी 50 वर्षों के लिए सृजित होने वाली अदालतों की जरूरत देखते भूमि आंवटन के लिए राज्य सरकार को वर्ष 2016 में प्रस्ताव भिजवाया था। कलक्टर कार्यालय ने 23 फरवरी 2017 को सांगानेर की आराजी नंबर 1344 रकबा 143-15 बीघा में से 50 बीघा भूमि नगर निगम को न्यायालय के लिए हस्तातंरित कर दी। इसका आवंटन निगम से सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप होना था।
निशुल्क दी जमीन
कलक्टर कार्यालय ने जिला एवं सेशन न्यायाधीश को भूमि आंवटन के सम्बन्ध में हाल ही नगर निगम से वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट मांगी। निगम ने न्यायालय भवन, न्यायिक अधिकारियों के आवास एवं अन्य सुविधाओं के लिए 03 फरवरी 2023 को 18 बीघा भूमि निशुल्क आंवटित करने की जानकारी दी। शेष भूमि को नगर निगम ने स्वयं के उपयोग-उपभोग-योजनाओं के उपयोग में लेने के प्रस्ताव तैयार कर 07 सितंबर 2021 को स्थानीय निकाय विभाग को भेजने की जानकारी दी।
नया प्रस्ताव सरकार को भिजवाया
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के आधार पर जेल भवन के लिए 18 बीघा भूमि आवंटित की थी। फिर भी जिला एवं सेशन न्यायालय के मांग पर नया प्रस्ताव फरवरी 2023 में राज्य सरकार को भेजा है, जो विचाराधीन है।
हेमाराम चौधरी, आयुक्त, नगर निगम
न्यायालय को 50 बीघा जमीन चाहिए
जिला एवं सेशन न्यायालय के प्रयास से सरकार ने नए भवन के लिए 50 बीघा भूमि आरक्षित की थी, लेकिन दुर्भाग्य से 18 बीघा भूमि आवंटित हो सकी। मौजूदा जमीन जिला मुख्यालय पर न्यायालयों की बढ़ी संख्या के अनुपात में कम है। कई न्यायालय किराए के भवन में तो कुछ जर्जर है। पार्किंग समस्या भी है। एक ही स्थान पर सभी न्यायालयों का संचालन होने से ही जमीन आवंटन की सार्थकता साबित होगी।
रामपाल शर्मा, महासचिव, जिला अभिभाषक संस्थान