भीलवाड़ा। जिले के वन क्षेत्र मेंं पहली बार पैंथर (बघेरा) की बड़ी संख्या में मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। गत 12 जून की रात धवल चांदनी रात में हुई वन्य जीव गणना के दौरान वन विभाग के फील्ड स्टाफ को जिले की छह रेंज के वन क्षेत्र में 70 पैंथर की मौजूदगी के साक्ष्य मिले हैं। इनमें सात शावक भी साथ में नजर आए हैं। जबकि वाटर होल पर प्यास बुझाने कुल छह पैंथर पहुंचे।
वन विभाग ने वन्य जीव गणना का आंकड़ा राज्य सरकार को प्रेषित कर दिया है। उपवन संरक्षक गौरव गर्ग ने बताया कि गणना दो तरीके से की गई। पचास वाटर होल पर नजर रखी गई तो फील्ड स्टाफ ने वन्य जीवों के पग मार्क, चिंह के आधार पर पहचान की। पैंथर की पहचान उनकी दहाड़ के आधार पर भी हुई है। उन्होंने बताया कि जिले में संभवत: पहली बार पैंथर बड़ी संख्या में नजर आए।
जिले में इस बार भी बाघ टाइगर की मौजूदगी के कोई साक्ष्य नहीं मिले, हालांकि बिजौलियां क्षेत्र में रामगढ़ रिजर्व के रास्ते पर उनके मौजूद होने की संभावना जताई गई है। मोरों की संख्या फील्ड स्टाफ को अधिक दिखी तो वाटर होल पर कम नजर आए।
जिले में वर्ष 2024 के मुकाबले इस साल वाटर होल पर जरख, सियार, जंगली, बिल्ली, लोमड़ी, भेडि़या, भालू, सियागोश व मगरमच्छ अधिक दिखे। जबकि नीलगाय, जंगली सूअर, नीलगाय, चिंकारा व बंदर-लंगूर की संख्या अपेक्षकृत कम नजर आई। इसी प्रकार दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध भी कम दिखे।
वाटर होल पद्ति की वन्य जीव गणना रिपोर्ट
वन्य जीव 2025 2024
बाघ 00 00
बघेरा 06 05
सियार 637 601
जरख 41 24
जंगली बिल्ली 39 31
बिल्ली 09 00
लोमड़ी 46 38
भेडिया 07 02
भालू 03 01
सियागोश 10 02
चीतल 00 38
काला हिरण 05 29
नीलगाय 1509 1925
चिंकारा 228 233
जंगली सूअर 544 564
सेह 61 54
बंदर-लंगूर 51 98
सारस 09 24
गिद्ध 02 19
मोर 1049 1110
मगरमच्छ 06 04