2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दस रुपए से भी कम में मिल रही खाने से भरी एक थाली

प्रदेश के स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन का मामला

2 min read
Google source verification
Mid Day

प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में भोजन तैयार करने वाले स्व-सहायता समूह और शाला विकास समिति मुश्किल में हैं। सरकार ने लम्बे समय से बच्चों की प्रति थाली की दर में वृद्धि नहीं की है। उपलब्ध राशि से भोजन सामग्री जुटाने मशक्कत करनी पड़ रही है।

केंद्र सरकार की इस योजना में वर्तमान में प्राथमिक स्कूल में प्रति बच्चे 6.19 रुपए तथा माध्यमिक स्कूल में 9.29 रुपए प्रति बच्चे की दर से राशि दी जा रही है। इसमें प्रत्येक बच्चे को रोटी, दाल और सब्जी निर्धारित मात्रा में दिए जाने का प्रावधान है।
ये रेट वर्तमान माह जून 25 में दिए जा रहे हैं। उसके बाद इस राशि में वृद्धि नहीं की गई है। इस राशि की तुलना में अनाज, मसाले, तेल, दाल और सब्जियों के दाम काफी बढ़ गए हैं। इस मध्याह्न भोजन के काम में लगे स्व-सहायता समूह के सदस्यों ने बताया कि कम बजट के चलते गुणवत्ता युक्त भोजन तैयार करने में काफी परेशानी हो रही है।

दाल के दाम ही 120 रुपए किलो पहुंच गए हैं, तो वहीं तेल के दाम भी आसमान छू रहे हैं। सब्जी में जरूरी हल्दी, मिर्च, जीरा, राई एवं गर्म मसाले के भाव दोगुने हो गए हैं। इससे मध्याह्न भोजन का संचालन मुश्किल हो रहा है। सरकार को मौजूदा महंगाई के हिसाब से मध्याह्न भोजन की दर में वृद्धि करना चाहिए।

रसोइया का मानदेय बढ़ाया

मध्याह्न भोजन की रसोइयों का मानदेय अब चार हजार रुपए कर दिया गया है। पहले इसे 2 हजार रुपए दिया जाता था। इसको लेकर रसोइयों ने विधानसभा चुनाव 2023 से पहले कई आंदोलन किए। उसके बाद पहले ही सरकार ने उनका मानदेय दोगुना चार हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया है।

हुई थी मामूली वृद्धि

इसी वर्ष प्राथमिक स्कूल में प्रति थाली दर 6.19 रुपए तथा माध्यमिक स्तर पर 9.29 रुपए की गई थी। यह मामूली वृद्धि महंगाई के सामने जीरा के समान थी। अब सामग्री के भाव बढ़ गए। अभी तक नए सिरे से मध्यान्ह भोजन की समीक्षा नहीं की गई है।