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ज्योतिष: इस रत्न को पहनने से सूर्य जैसी चमकने लगती है किस्मत, सिंह राशि वालों के लिए माना जाता है वरदान

Gemstone Rings: ये रत्न काफी प्रभावशाली माना जाता है। जानिए इस रत्न से जुड़ी जरूर बातें।

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ज्योतिष: इस रत्न को पहनने से सूर्य जैसी चमकने लगती है किस्मत, सिंह राशि वालों के लिए माना जाता है वरदान

Ruby Gemstone: ज्योतिष शास्त्र में कई रत्नों और उपरत्नों के बारे में बताया गया है। कहते हैं रत्न धारण करने से ग्रहों की स्थिति में सुधार होने लगता है। हर ग्रह का किसी न किसी रत्न से संबंध माना जाता है। मोती रत्न चंद्रमा के लिए तो नीलम रत्न शनि के लिए धारण किया जाता है। ऐसे ही बुध के लिए पन्ना और बृहस्पति के लिए पुखराज धारण करना शुभ होता है। आज यहां हम बात करने जा रहे हैं सूर्य देव के रत्न माणिक्य के बारे में। ये रत्न काफी प्रभावशाली माना जाता है। जानिए इस रत्न से जुड़ी जरूर बातें।

माणिक्य रत्न के फायदे: जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर हों या सूर्य का शुभ प्रभाव नहीं मिल पा रहा हो उन्हें ये रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। इस रत्न को पद्मराग और रविरत्न भी कहा गया है। अंग्रेजी में इसे रूबी स्टोन कहा जाता है। इस रत्न को धारण करने से जीवन में सुख-समृद्धि आने के साथ-साथ व्यक्ति स्वस्थ रहता है। ये व्यक्ति के गौरव को और बुद्धि को बढ़ाता है।

किन्हें धारण करना चाहिए माणिक्य रत्न: ये रत्न मेष, सिंह और धनु लग्न वालों को धारण करना चाहिए। कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न वालों को ये रत्न साधारण परिणाम देता है। जिन लोगों को दिल और नेत्र का रोग है उन्हें ये रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। वहीं कुंडली में अगर ग्याहरवां भाव, दशम भाव, नवम भाव, पंचम भाव, एकादश भाव में सूर्य उच्च स्थिति में हैं तो भी माणिक धारण कर सकते हैं।

किन्हें धारण नहीं करना चाहिए ये रत्न: कन्या, मकर, तुला, मिथुन और कुंभ लग्न वालों को ये रत्न धारण करने से बचना चाहिए। अगर कुंडली में सूर्य नीच की स्थिति में हों तो भी माणिक्य धारण नहीं करना चाहिए। अगर आप शनि से संबंधि कोई काम कर रहे हैं तो भी इस रत्न को धारण नहीं करना चाहिए।

माणिक्य धारण करने की विधि: ये रत्न हल्का गुलाबी या लाल रंग का होता है। ये रत्न वजन में कम से कम 6 रत्ती का होना चाहिए। इस रत्न को तांबे या सोने की धातु में धारण करना चाहिए। इस रत्न को सूर्योदय पर स्नान कर धारण करना चाहिए। ध्यान रखें कि इस रत्न जड़ित अंगूठी को पहले गाय के दूध या गंगाजल में डालकर शुद्ध कर लें। उसके बाद एक माला सूर्य देव के मंत्र 'ओम सूर्याय नमः' की जप करें और फिर अंगूठी को धारण करें। अंगूठी को धारण करने के लिए रविवार, सोमवार और बृहस्पतिवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है।
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(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।)

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