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क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी, जानें धार्मिक व पौराणिक महत्व

मौसम के अनुसार इसलिए खास है बसंत पंचमी

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भोपाल

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Tanvi Sharma

Jan 27, 2020

क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी, जानें धार्मिक व पौराणिक महत्व

हिंदू धर्म में माघ मास का बहुत अधिक महत्व माना जाता है क्योंकि इस माह में कई महत्वपूर्ण पर्व और बसंत पंचमी जैसे प्रमुख व पावन त्योहार पड़ते हैं। खासकर बसंत पंचमी का त्योहार, इस पावन दिन देवी सरस्वती के अवतरण दिवस के रुप में मनाया जाता है। इस दिन देवी सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है। लेकिन बसंत पंचमी सिर्फ इसलिये ही नहीं बल्कि कई अन्य मायनों में भी बहुत महत्व रखता है। आइए जानते हैं क्या है बसंत पंचमी के धार्मिक व अन्य महत्व...

मौसम के अनुसार इसलिए खास है बसंत पंचमी

इस साल यह त्योहार 30 जनवरी दिन गुरुवार को है। बसंत पंचमी का उत्सव न सिर्फ भारत में बल्कि भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश और नेपाल में काफी उत्साह से मनाया जाता है। माघ माहीने के पांचवे दिन बसंत पंचमी पड़ती है और इस दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा की जाती है। हालांकि इस दिन मुख्य रुप से मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामदेव और इनकी पत्नी रति धरती पर आते हैं और प्रकृति में प्रेम रस का संचार करते हैं इसलिए बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती के साथ कामदेव और रति की पूजा का भी विधान है। शास्त्रों में पूर्वाह्न से पूर्व सरस्वती पूजन करने का नियम बताया गया है।

इसलिये मनाई जाती है बसंत पंचमी

पौराणिक मान्यता के अनुसार, सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्मा ने जीवों और मनुष्यों की रचना की है। लेकिन सृष्टि की तरफ जब ब्रह्मा जी देखते हैं तो उस समय ब्रह्मा जी को चारों तरफ सुनसान और शांत माहौल नजर आता है। इसलिये उन्हें महसूस होता है कि, कोई कुछ बोल नहीं रहा है। जिसे देखकर ब्रह्मा जी मायूस हो जाते हैं। जिसके बाद ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु से अनुरोध किया की और विष्णु जी ने कमंडल से पृथ्वी पर जल का छिड़काव किया और उस जल के द्वारा पृथ्वी हिलने लगी। पृथ्वी के हिलने के बाद एक अद्भुत शक्ति मां सरस्वती के रुप में प्रकट हुई। देवी के एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में वर मुद्रा होती है और वहीं अन्य हाथों में पुस्तक और माला थी। ब्रह्मा जी उस स्त्री से वीणा बजाने का निवेदन करते हैं इस तरह देवी के वीणा बजाने से संसार के सभी जीव-जंतुओं को आवाज मिल जाती है। वह दिन बसंत पंचमी का दिन था और तभी से देवी सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।