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भाजपा-जद-एस गठबंधन से लगी डीके बंधुओं के गढ़ में सेंध

डीके बंधुओं के गढ़ के तौर पर मशहूर बेंगलूरु ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र में उप मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश की करारी हार ने कांग्रेस को चौकन्ना कर दिया है।अपनी जीत के प्रति आश्वस्त डीके सुरेश और डीके शिवकुमार को ऐसे परिणाम की तनिक भी उम्मीद नहीं थी। लेकिन, परिणामों […]

बैंगलोरJun 07, 2024 / 07:26 pm

Rajeev Mishra

डीके बंधुओं के गढ़ के तौर पर मशहूर बेंगलूरु ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र में उप मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश की करारी हार ने कांग्रेस को चौकन्ना कर दिया है।
अपनी जीत के प्रति आश्वस्त डीके सुरेश और डीके शिवकुमार को ऐसे परिणाम की तनिक भी उम्मीद नहीं थी। लेकिन, परिणामों ने उन्हें झकझोर दिया क्योंकि, बेंगलूरु ग्रामीण समेत कई लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा-जद-एस गठबंधन काफी कारगर साबित हुआ है। बेंगलूरु ग्रामीण में डीके सुरेश को अजेय माना जा रहा था। लेकिन, हृदय रोग विशेषज्ञ व पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के दामाद डॉ सीएन मंजुनाथ ने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर पहली बार यहां जीत दर्ज करते हुए डीके सुरेश को 2.69 लाख मतों के भारी अंतर से हराया।
कनकपुर और रामनगर में डीके सुरेश को मिली मामूली बढ़त
बेंगलूरु ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 8 विधानसभा सीटों में से डीके सुरेश को केवल दो विधानसभा क्षेत्रों कनकपुर और रामनगर में बढ़त मिली। वह भी आशा के अनुरूप नहीं थी। कनकपुर विधानसभा क्षेत्र से खुद डीके शिवकुमार विधायक हैं और पिछली बार उन्होंने यहां से 1.22 लाख मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। यहां डीके सुरेश को केवल 25 हजार 677 मतों की बढ़त मिली। खुद शिवकुमार मानते हैं कि, इस विधानसभा क्षेत्र में 50 से 60 हजार की बढ़त मिलनी चाहिए थी। वहीं, रामनगर में कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन हैं। वे जो शिवकुमार के वफादार हैं। यहां सुरेश को केवल 145 वोटों की बढ़त मिली।
कांग्रेस के गढ़ में आगे रहे डॉ मंजुनाथ
कांग्रेस विधायक होने के बावजूद आनेकल, मागड़ी और कुनिगल में भाजपा प्रत्याशी मंजुनाथ को बढ़त मिली। वहीं, चन्नपट्टण विधानसभा क्षेत्र से जहां उनके बहनोई और पूर्व मुख्यमंत्री विधायक हैं मंजुनाथ को बढ़त मिली। लेकिन, राजराजेश्वरी नगर और बेंगलूरु दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में डॉ.मंजुनाथ को 1.96 लाख मतों की बढ़त मिली। शिवकुमार खुद बेंगलूरु के इन निर्वाचन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रीत कर रहे थे क्योंकि यहां डीके सुरेश की पहुंच अच्छी नहीं समझी जाती है।
भाजपा-जद-एस के मतदाता आए साथ
पिछले साल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बेंगलूरु ग्रामीण के अंतर्गत आने वाले आठ निर्वाचन क्षेत्रों में 8.12 लाख वोट हासिल किए थे। इस बार कांग्रेस को 8.07 लाख वोट मिले। यानी, कांग्रेस कमोबेश अपने आधार को बनाए रखने में सफल रही। वहीं, पिछले साल विधानसभा चुनाव में भाजपा को इन आठ विधानसभा क्षेत्रों में 6.09 लाख वोट मिले थे और जद-एस को 3.62 लाख वोट मिले थे। लोकसभा चुनावों में, भाजपा को 10.7 लाख वोट मिले। यानी, भाजपा और जद-एस मतों का पूर्ण हस्तांतरण सफलतापूर्व हुआ। गृहमंत्री डॉ जी.परमेश्वर ने भी माना कि, ओल्ड मैसूरु में भाजपा-जद-एस गठबंधन कारगर साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि, अनुमान था कि गठबंधन काम नहीं करेगा जैसा कि 2019 में कांग्रेस-जद-एस गठबंधन के दौरान हुआ था। लेकिन इसने बड़ी सफलता हासिल की।

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