
लंदन. दुनिया में पहली बार स्वच्छ हरित ऊर्जा का स्रोत विकसित करने वाले ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस थॉमस बेकन को उनकी खोज के सात दशक बाद अब पहचान मिली है। 1969 में नासा के अपोलो-11 मिशन के लिए ऊर्जा का स्रोत देकर बेकन ने पहली बार इंसान को चांद पर उतरने में मदद की। पृथ्वी पर लौटने के बाद, अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग, बज एल्ड्रिन और माइकल कोलिन्स ने उन्हें चंद्रमा पर पहले कदम की हस्ताक्षरित तस्वीर भेंट की। मिशन की सफलता के बाद तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने उनसे कहा था, आपके बिना हम चांद पर नहीं पहुंच पाते। एसेक्स में जन्मे कैंब्रिज के इंजीनियर बेकन ने पहली बार 1932 में हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल का आविष्कार किया था, जिसे बाद में नासा ने उनके सम्मान में इसे ‘बेकन सेल’ का नाम दिया। उनके योगदान को अब तक विशेष पहचान नहीं मिल पाई थी, लेकिन अब कैंब्रिज की संस्था प्रजेंट एंड फ्यूचर बेकन की उपलब्धियों को देखते हुए कैंब्रिजशायर स्थित उनके पुराने घर पर नीली पट्टिका लगाकर सम्मान देना चाहती है। वर्ष 1992 में बेकन का निधन हो गया था।
अंतरिक्ष यात्रियों को बिजली के साथ पानी भी मिला
बेकन की ईंधन कोशिकओं ने अपोलो मिशन के लिए सेकंडरी ऊर्जा प्रदान की, जिससे संचार, एयर कंडीशनिंग और रोशनी के साथ ही अंतरिक्षयात्रियों के लिए पानी उपलब्ध हो सका। बेकन ने खुद अपोलो मिशन के चांद पर उतरने से पहले रेडियो पर कहा था, बैटरी समय के साथ खत्म हो जाती है और इसे रिचार्ज करना पड़ता है। लेकिन इस ऊर्जा उपकरण में जब तक आप ऑक्सीजन-हाइड्रोजन डालते रहेंगे, यह अनिश्चितकाल तक बिजली और पानी देता रहेगा।
जुनूनी ऐसे कि आविष्कार के लिए नौकरी छोड़ दी
बेकन ने 1932 में कंपनी के परिसर में गुप्त रूप से अत्यधिक ज्वलनशील गैसों के साथ प्रयोग शुरू किया। जब उनसे कहा गया कि या तो वे काम बंद कर दें या जगह छोड़ दें तो उन्होंने अपनी नौकरी ही छोड़ दी और पूरा जीवन अपने आविष्कार को समर्पित कर दिया। उनसे करीब एक सदी पहले भौतिक विज्ञानी विलियम ग्रोव ने 1839 में ईंधन कोशिकाओं की सैद्धांतिक अवधारणा प्रस्तुत की, लेकिन वह पर्याप्त बिजली पैदा करने में विफल रहे।
Published on:
03 Nov 2024 11:51 pm
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