
सागर. जमीनों की खरीद-फरोख्त में जमकर फर्जीवाड़ा चल रहा है। प्रॉपर्टी के दलाल और भू-माफिया हर जगह सक्रिय हैं और इनकी सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों से सेटिंग भी है, जिसके चलते यह कूटरचित दस्तावेज तैयार कराकर जमीनों की रजिस्ट्रियां कराने में जुटे हुए हैं। हालही में सागर में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं, जिनमें किसी को कागजों में मरा साबित कर दिया तो किसी के नकली नानी, बुआ, मौसी आदि बनाकर फर्जी लोगों को खड़ाकर जमीन की रजिस्ट्रियां करा दीं। इतना ही नहीं एक मामले में तो एक 34 साल के युवक को 70 साल का बुजुर्ग बनाकर जमीन बेच दी गई है। हैरानी की बात यह है कि पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री के दौरान लोगों के आधार कार्ड लेकर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी कराया जाता है, इसके बाद भी अधिकारी फर्जीवाड़ा पकडऩे में नाकाम साबित हो रहे हैं।
बहेरिया थाना क्षेत्र के लुहारी निवासी 70 वर्षीय किसान मिट्ठूलालपुत्र बारेलाल अहिरवार ने 31 जुलाई को कलेक्टर-एसपी से शिकायत की थी। जिसमें बताया कि उनकी गांव पर दो एकड़ जमीन है, जिसे किसी 34 साल के मिट्ठूलाल नामक व्यक्ति ने कैंट क्षेत्र के रहने वाले केतन पुत्र विनोद साहूू को रजिस्ट्री कर दी। किसान ने बताया कि इस फर्जीवाड़े का पता उन्हें तब चला जब वे मकरोनिया स्थित बैंक में उसी जमीन पर चल रहे ऋण की किश्त जमा करने पहुंचे।
परसोरिया निवासी हल्ले भाई पुत्र लल्लू प्रसाद अहिरवार 13 अगस्त को अपनी 85 वर्षीय नानी को गोद में लेकर कलेक्टर से शिकायत करने पहुंचे थे। शिकायत में बताया कि नानी के नाम से परसोरिया में नानी तुलसाबाई पत्नी मानसिंह अहिरवार की जमीन है, जिसे प्रॉपर्टी के दलालों ने मिलकर एक महिला को पकड़ा और फर्जी आधार कार्ड बनवाकर रजिस्ट्री करा दी। कुछ देर बाद कलेक्टर कार्यालय में नकली तुलसाबाई भी पहुंच गई, जिसने बताया कि झूठ बोलकर पंजीयक कार्यालय लाए थे, दलालों ने पांच हजार रुपए भी दिए थे।
अमेरिका में रहने वाली एनआरआई महिला निशा जैन की मकरोनिया क्षेत्र में करीब ढाई करोड़ रुपए की जमीन है, जिसे हथियाने के लिए जबलपुर निवासी एक महिला ने खुद को निशा जैन का करीबी रिश्तेदार बताकर प्रॉपर्टी दलालों से संपर्क किया। इसके बाद मकरोनिया नगर पालिका से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर जमीन अपने नाम करवा ली थी। कतिपय गिरोह जब उक्त प्रॉपर्टी को बेचने की फिराक में घूम रहा था तभी एनआरआई महिला के भाई को इसकी जानकारी लग गई और फिर इसकी शिकायत के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया।
फर्जी दस्तावेज तैयार कर नकली लोगों को जमीन का मालिक बताकर हो रही रजिस्ट्रियों में शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों की सांठगांठ होने से इनकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि एक केस में यह बात भी सामने आई है कि किसान की जिस जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई, उस पर बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड बना हुआ है। जमीन के खसरा-बी-1 पर जमीन बैंक में बंधक है, इसके बाद भी उसकी बिक्री कैसे कर दी गई। यह केस पुष्टि कर रहा है कि इस फर्जीवाड़े में पंजीयक कार्यालय की अहम भूमिका है।
ऐसी शिकायत मुझे नहीं मिली हैं। आधार कार्ड में अधिकांश फोटो मिलान में समस्या आती है, आधार के जरिए थंब इंप्रेशन को मैच करने के अधिकार उप पंजीयक को नहीं हैं। इन्हीं समस्याओंं को दूर करने संपदा 2.0 में सुविधाएं हैं और सॉफ्टवेयर रजिस्ट्री के दौरान तत्काल ऐसे फर्जीवाड़ों को पकड़ लेगा।
निधी जैन, वरिष्ठ जिला पंजीयक, सागर
Published on:
22 Aug 2024 11:06 am

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