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चार वर्ष का डिग्री कोर्स खत्म, तीन साल का पाठ्यक्रम फिर बहाल

राज्य शिक्षा नीति आयोग ने सरकार को अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट में डिग्री कार्यक्रम की अवधि में बदलाव की सिफारिश की थी। अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर, सरकार ने डिग्री कार्यक्रम को तीन साल तक सीमित करने का निर्णय लिया

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सिफारिशें 'ऐतिहासिक अनुभव, छात्रों के समग्र हितों के सिद्धांत, समानता, सामाजिक न्याय और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए समान अवसर' पर आधारित हैं

प्रोफेसर सुखदेव थोराट के नेतृत्व वाले राज्य शिक्षा नीति आयोग द्वारा की गई सिफारिशों पर विचार करने के बाद कर्नाटक सरकार ने बुधवार को अपने एक अहम फैसले में सरकारी विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों में चार साल के डिग्री कार्यक्रम को रद्द कर दिया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) 2020 में इसकी सिफारिश की गई थी। शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के लिए तीन साल के डिग्री कार्यक्रम (चौथे वर्ष का कोई विकल्प नहीं) को फिर से शुरू किया है। चार साल के डिग्री कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में स्पष्टता की कमी को लेकर चिंता थी।

आयोग ने की थी सिफारिश
राज्य शिक्षा नीति आयोग ने सरकार को अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट में डिग्री कार्यक्रम की अवधि में बदलाव की सिफारिश की थी। अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर, सरकार ने डिग्री कार्यक्रम को तीन साल तक सीमित करने का निर्णय लिया और तीन यूजी (स्नातक) पाठ्यचर्या रूपरेखा (सीएफडब्ल्यू) की भी सिफारिश की, जिस पर सहमति हो गई है।

सबको मिले समान अवसर
आयोग का तर्क है कि सिफारिशें 'ऐतिहासिक अनुभव, छात्रों के समग्र हितों के सिद्धांत, समानता, सामाजिक न्याय और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए समान अवसर' पर आधारित हैं। चार साल का डिग्री कार्यक्रम रखने से गरीबों, सामाजिक रूप से वंचित समूहों जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए स्नातक शिक्षा तक पहुंच कम हो जाएगी। इसके अलावा, चार -वर्षीय यूजी कार्यक्रम शुरू करने के लिए कॉलेजों की अनिच्छा के कारणों में से एक के रूप में भौतिक बुनियादी ढांचे की कमी और सुविधाओं और संकाय की अनुपलब्धता का उल्लेख किया गया है।

मौजूदा छात्रों पर असर नहीं
आयोग ने कहा है कि वह नवंबर 2023 में आयोजित विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेज प्राचार्यों के कुलपतियों, डीन और अध्ययन बोर्ड के प्रमुखों के साथ परामर्श बैठकों के बाद उपरोक्त सिफारिशों पर पहुंचा। वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 में नामांकित छात्रों पर नए बदलावों का असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने में सरकारी विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों को सभी छह सेमेस्टर में सामान्य डिग्री के साथ तीन प्रमुख डिग्री या चौथे सेमेस्टर तक तीन बड़ी डिग्री और पांचवें व छठे सेमेस्टर में एक विषय में विशेषज्ञता की अनुमति दी है।