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चाणक्य नीति पहला अध्याय: कहां और कैसे लोगों के साथ रहने से आप हो सकते हैं परेशान?

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) में मित्र, दुश्मन, स्त्रियों, राजा के कर्तव्य, धन, संपत्ति से जुड़ी बातों का जिक्र किया गया है। 'चाणक्य नीति' में कुल सत्रह अध्याय है। जानिए इसके प्रथम अध्याय में कही गई जीवन से जुड़ी कुछ जरूरी बातें।

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चाणक्य नीति पहला अध्याय: कहां और कैसे लोगों के साथ रहने से आप हो सकते हैं परेशान?

Chanakya Niti Quotes: आचार्य चाणक्य को कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से जाना है। इनकी नीतियां आज के समय में भी काफी प्रचलित हैं। चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री के रूप में विश्वविख्‍यात हुए। "चाणक्य नीति" आचार्य चाणक्य की नीतियों का संग्रह है जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना की हजार साल पहले था। चाणक्य नीति में मित्र, दुश्मन, स्त्रियों, राजा के कर्तव्य, धन, संपत्ति से जुड़ी बातों का जिक्र किया गया है। 'चाणक्य नीति' में कुल सत्रह अध्याय है। यहां आप जानेंगे इसके प्रथम अध्याय में कही गई कुछ अहम बातों के बारे में जो आपका जीवन बदल सकती हैं।

ऐसा व्यक्ति रहता है हमेशा परेशान: चाणक्य नीति अनुसार दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, बदमाश नौकर और सर्प के साथ निवास करना साक्षात् मृत्यु के समान है। चाणक्य की इस नीति का मतलब है कि अगर पत्नी सही नहीं है तो पुरुष का जीवन परेशानियों से भर जाता है। अगर मित्र सच्चा नहीं है तो आपके लिए ये कभी भी घातक साबित हो सकता है। अगर नौकर बदमाश है तो उसके मालिक की मासनिक शांति हमेशा भंग ही रहेगी। साथ ही सांप के साथ निवास करना भी मृत्यु को बुलावा देने वाली बात है।

मुसीबतों में सिर्फ ये एक चीज आती है काम: चाणक्य नीति अनुसार व्यक्ति को भविष्य में आने वाली मुसीबतों के लिए धन एकत्रित करके रखना चाहिए। ऐसा बिल्कुल भी ना सोचें की धनवान व्यक्ति को कभी मुसीबत आएगी ही नहीं। क्योंकि जब धन साथ छोड़ता है तो संगठित धन भी तेजी से घटने लगता है।

लोगों की कैसे करें पहचान: चाणक्य नीति अनुसार नौकर की परीक्षा तब करें जब वह कर्त्तव्य का पालन न कर रहा हो, रिश्तेदार की परीक्षा तब लें जब आप किसी मुसीबत मे घिरें हों, मित्र की परीक्षा तब करें जब आप विपरीत परिस्थितियों मे फंसे हों और जब आपका समय अच्छा न चल रहा हो तब अपनी पत्नी की परीक्षा लें।

बुद्धिमान व्यक्ति को कैसी जगह पर नहीं रहना चाहिए? जहां रोजगार कमाने का कोई माध्यम ना हो, किसी बात का भय न हो, जहां लोगों को किसी बात की लज्जा न हो, जहा बुद्धिमान और ज्ञानी लोग न हों और जहाँ पर लोगों की वृत्ति दान धरम के कार्य करने की ना हो।

कैसा व्यक्ति परेशानी में आ जाता है? चाणक्य नीति अनुसार एक पंडित भी घोर कष्ट में आ जाता है जब वह किसी मुर्ख व्यक्ति को उपदेश देता है, यदि वह एक दुष्ट पत्नी का पालन-पोषण करता है या किसी दुखी व्यक्ति के साथ बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध बना लेता है। तात्पर्य ऐसे लोगों का साथ हमेशा कष्ट पहुंचाने का काम करता है।
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