
चंद्र ग्रहण के दौरान इस समय करें ये उपाय, पानी की तरह बरसेगा पैसा
ग्रहणकाल के दौरान कई सावधानियां बरतने को कहा जाता है। चाहे सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण दोनों से ही लोग भयभीत होते हैं। लेकिन ग्रहण काल के दौरान आपको नुकसान ही नहीं कुछ फायदे भी होते हैं। इस समय में आप अपनी इच्छानुसार कई उपाय कर सकते हैं जिनसे आपको अत्यधिक लाभ मिल सकता है। आध्यात्मिक साधना के क्षेत्र में यंत्र-मंत्र सिद्धि साधना के लिए ग्रहण काल का अपना विशेष महत्व है। चंद्रग्रहण के समय मंत्र सिद्धि, साधनादि के लिए सिद्धिदायक माना जाता है। ज्योतिष में इससे भी अधिक सूक्ष्मता से ऋषि-मुनियों ने ग्रहणों के प्रभाव का अध्ययन भूकंप ही नहीं बल्कि मनुष्य के ऊपर भी किया है।
इस वर्ष का दूसरा व अंतिम चंद्रग्रहण 27 और व 28 जुलाई 2018 की रात में 23:56:26 से 03:48:59 बजे तक दिखाई देगा। इसकी दृश्यता भारत समेत कई देशों में होगी। इस दौरान पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह चंद्रग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र तथा मकर राशि में लग रहा है।
कुछ ऐसे कार्य होते हैं जौ ग्रहण के अशुभ प्रभावों से छुटकारा पाने में मददगार होते हैं। ग्रहण के दिन गरीबों को दान देना, भोजन कराना, गायत्री मंत्र का जाप करना अच्छा माना जाता है। इसके अलावा अपने ईष्ट देव की आराधना और उपवास रखना भी काफी प्रभावशाली होता है। ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान कर भोजन ग्रहण करना चाहिए। गर्भवती महिलाएं इन तिथियों पर सावधान रहें और अपने आने वाले बच्चे को ग्रहण के प्रभाव से बचाने के लिए ग्रहण के समय एकांत स्थान पर बैठ कर पूजा-पाठ करें और बड़े बुर्जुर्गों के निर्देशानुसार कार्य करें। वहीं ग्रहण काल के समय अपनी इच्छानुसार कार्यों को पूर्ण करने के लिए इन उपायों को करें सफलता प्राप्त होगी।
इन उपायों से करें अपने कार्य सिद्ध
1. व्यापार नहीं चल रहा है तो गल्ले या तिजोरी में दक्षिणावर्त शंख, 7 लघु नारियल, 7 गोमती चक्र रखें।
2. रोग निवारण के लिए, ग्रहण काल में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए, महामृत्युंजय यंत्र का अभिषेक करें ।
3. रोग निवृति हेतु, कांसे की कटोरी में पिघला देसी घी भरें, एक रुपया या सामर्थयनुसार ,चांदी या सोने का सिक्का या टुकड़ा डालें । इसमें रोगी अपनी परछाईं देखे और किसी को दान कर दे।
4. असाध्य रोग के लिए, ग्रहण पर तुला दान सबसे अच्छा माना गया है।
5. धन प्राप्ति के लिए, श्री यंत्र या कुबेर यंत्र पूजा स्थान पर अभिमंत्रित करवा के रखें और श्री सूक्त पढें।
6. ग्रहण काल में कालसर्प योग या राहू दोष की शांति किसी सुयोग्य कर्मकांडी द्वारा करवाएं।
7. ग्रहण समाप्ति पर अपने पहने कपड़े उतार कर, 7 अनाज शरीर से 7 बार उल्टा घुमा कर अपंग, कुष्ठ रोगी या दान के सुपात्र ,दान- ग्रहणकर्ता को देने से कष्ट दूर होते हैं।
Published on:
20 Jul 2018 01:12 pm
