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Illegal Abortion Racket: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां मानवता को शर्मसार करने वाले एक बड़े अवैध धंधे का भंडाफोड़ हुआ है। यहां पिछले करीब डेढ़ साल से अजन्मे बच्चों को कोख में ही मारने का घिनौना खेल चल रहा था। पुलिस ने एक गुप्त ऑपरेशन चलाकर इस काले कारोबार की कमान संभाल रहे एक डॉक्टर और दो नर्सों को गिरफ्तार किया है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस अपराध में महिलाएं ही शामिल थीं। जो मासूमों को दुनिया में आने से पहले ही खत्म कर रही थीं। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और पुलिस अब इस रैकेट की गहराई से जांच कर रही है।
दरअसल, पुलिस ने हाल में ही संभाजी नगर में एक अवैध गर्भपात रैकेट का भंडाफोड़ किया है। चौंकाने वाली बात है कि इसमें शामिल आरोपी एक स्थानीय मेडिकल कॉलेज में नर्स हैं और यह पूरा अवैध धंधा इसी कनेक्शन के जरिए चलाया जा रहा था। पुलिस को मिली एक गुप्त सूचना के बाद छापा मारा गया और पूरे धंधें का प्रदाफाश हो सका।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर रविवार की आधी रात को एक ठिकाने पर अचानक छापा मारा। कार्रवाई के दौरान आरोपी रंगे हाथों पकड़े गए। जिनमें वह पीड़ित महिला भी शामिल थी जो गर्भपात कराने के लिए वहां पहुंची थी। गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में वर्षा जाधव और ज्योति पवार नाम की दो नर्सें और उज्ज्वला गायकवाड़ नाम की एक महिला शामिल है। जो मेडिकल कॉलेज में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी वर्षा और उज्ज्वला आपस में सगी बहनें हैं। जो चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहुंच का फायदा उठाकर पिछले डेढ़ साल से इस अवैध नेटवर्क को अंजाम दे रही थीं।
पुलिस ने बताया कि यह अवैध धंधा पिछले डेढ़ साल से सतारा इलाके में उनके घर से ही चलाया जा रहा था। पुलिस को इसकी भनक लग गई थी और वे पिछले चार दिनों से संदिग्धों पर नजर बनाए हुए थे। आखिरकार, जब एक महिला गर्भपात करवाने के लिए आई तो पुलिस को वह पुख्ता जानकारी मिल गई जिसकी उन्हें जरूरत थी और उन्होंने छापा मार दिया।
इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद चौंकाने वाला था। जिसका जाल संभाजीनगर के ग्रामीण इलाकों तक फैला हुआ था। इस रैकेट ने सिल्लोड तालुका के निलोड में एक डॉक्टर को बतौर एजेंट बनाकर रखा हुआ था। वही मरीजों पर नजर रखता था। ये आरोपी सीधे मरीजो के घर पहुंचते थे और एक पोर्टेबल मशीन के जरिए अवैध रूप से सोनोग्राफी कर भ्रूण के लिंग की जांच करते थे। एक बार लिंग का पता चल जाने के बाद संबंधित महिला को गर्भपात के लिए शहर लाया जाता था। यह पूरी अवैध प्रक्रिया किसी अस्पताल में नहीं सतारा इलाके में स्थित आरोपी के घर पर ही अंजाम दी जाती थी। इस घिनौने काम के लिए वे प्रति केस कम से कम 50,000 रुपये की मोटी रकम वसूलते थे।
इस पूरे मामले में पुलिस ने दो महिलाओं और निलोद के एक चिकित्सक को गिरफ्तार किया है। वहीं, एक और आरोपी अभी भी फरार है। पुलिस ने शक जताया है कि इस आरोपी से 50 से अधिक गर्भपात किए होंगे। वहीं, नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारियों को शक है कि यह एक बहुत बड़ा रैकेट है। चौंकाने वाली बात यह है कि गर्भपात के लिए जरूरी दवाएं बड़ी मात्रा में उस जगह पर भी मिलीं, जहां आरोपी यह काम करता था। मरीजों के घर पर सोनोग्राफी करना और ये खास दवाएं हासिल करना। दोनों ही पूरी तरह से गैर-कानूनी काम हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि वह इस मामले की पूरी और गहरी जांच कर रहा है।
Published on:
06 Apr 2026 07:07 pm
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