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चिन्हांकन के बाद भी शहर में खड़े जर्जर भवन, हादसे का डर, 85 भवन धराशायी, अनदेखी से ढह रही गौरवशाली इमारतें

शहर के बीचों-बीच खड़ा महल अब अपनी विरासत को समेटे हुए ढह रहा है। न तो नगर पालिका इसकी सुध ले रही और न ही प्रशासन।
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jajrjar bhavan

जर्जर भवन

शहर में इतिहास से जुड़े कई भवन हैं जो शहर की ऐतहासिक गाथाओं का वर्णन करते हैं। इन भवनों में इतिहास के गौरवशाली किस्सों की कहानियां छुपी हुई हैं। आज, लेकिन ये गौरवशाली भवन प्रशासन की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। जर्जर हालत में यह अपने बूढ़े होने का अहसास करा रहे हैं। शहर के बीचों-बीच खड़ा महल अब अपनी विरासत को समेटे हुए ढह रहा है। न तो नगर पालिका इसकी सुध ले रही और न ही प्रशासन। जून माह के बाद प्रशासन का दावा है कि जर्जर भवनों को धराशायी कर दिया है, लेकिन शहर में अब भी ऐसी इमारतें हैं जो जर्जर हैं और कभी भी इनके ढहने से बड़ा हादसा हो सकता है।

महल हुआ जर्जर

शहर के बीचों बीच स्थित महल का पिछला हिस्सा ढह चुका है और इसके आसपास सडक़ होने से राहगीरों को खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने इस महल की कोई खबर नहीं ली है। महल की दीवारें जर्जर हैं। जो दीवारें कभी इतिहास की गौरवगाथा की पहचान थीं, वे आज अपने अस्तित्व को खो चुकी हैं।

85 भवनों को गिराया

प्रशासन और नपा का दावा है कि जर्जर 85 भवनों को गिराया गया है, लेकिन पुराने भवनों का जीर्णोद्धार करने में प्रशासन सफल नहीं हो पाया है। शहर में कई ऐतिहासिक भवन हैं जो आज अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं। महल अपनी पहचान खो रहे हैं।महलों में सरकारी कार्यालयकुछ महलों में सरकारी कार्यालय बना दिए गए हैं तो उनका विकास तो हो गया है, लेकिन कुछ भवनों की स्थिति आज भी बदहाल है। प्रशासन की अनदेखी से यह आज जर्जर हैं और कभी भी गिरकर हादसे का रूप ले सकते हैं।

इनका कहना है

जर्जर भवनों को गिराया गया है। साथ ही पुराने महलों का जीर्णोद्धार भी हुआ है। जो भी पुरातन इमारतें हैं उनके सुधार की योजना बनाई जा रही है।

अखिल राठौर, एसडीएम