
नवरात्रि के 9 दिनों का बहुत महत्व होता है, लेकिन इन 9 दिनों से भी ज्यादा अधिक महत्व अष्टमी का होता है। अष्टमी के दिन दुर्गा के महागौरी की पूजा की जाती है। महाअष्टमी के दिन कई उपाय व विशेष पूजा भी कि जाती है। क्योंकि इस दिन दुर्गा जी का गौरी स्वरुप बहुत ही शक्तिशाली और मनोकामनाएं पूरी करने वाला रुप माना जाता है। महाअष्टमी का पूजन सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला भी है।
महाअष्टमी का खास महत्व बंगाल में माना जाता है। यहां अष्टमी के दिन मां दुर्गा को पुष्पांजली अर्पित कि जाती है और देवी मां की मंत्रोच्चारण के साथ प्राण प्रतिष्ठा भी की जाती है। इसके साथ ही दुर्गा मैय्या के सामने 108 दीप भी प्रज्वलित किये जाते हैं। दुर्गाअष्टमी के दिन का महत्व सभी जगहों की अपेक्षा बंगाल में ज्यादा माना जाता है।
हालांकि अन्य जगहों पर भी महागौरी की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है और इसका भी अधिक महत्व माना जाता है। इस दिन कई जगहों पर कन्या पूजन भी किया जाता है। मनोकामनाएं पूरी करने के साथ-साथ महागौरी की पूजा व्यक्ति के सभी असंभव कार्यों को संभव कर देती हैं।
दुर्गा अष्टमी शुभ मुहूर्त-
अष्टमी तिथ समाप्त: 06 अक्टूबर 2019 को सुबह 10 बजकर 54 मिनट तक
ऐसे करें कन्या पूजन की तैयारी
कन्या जब घर में आए तो सबसे पहले उनके पैरों को अपने हाथों से धुलाकर उसमें महावर या कुमकुम लगाएं। इसके बाद उनके हाथों में दो तरह की दक्षिणा दें। जब कन्या पूजन संपन्न हो जाए और कन्या जानें लगे तब उनसे एक दक्षिणा लेकर रख लें और उसे अपनी तिजोरी में रख दें। घर में सदैव बरकत बनी रहेगी। इसके अलावा नौं दिनों तक कन्या पूजन कैसे करनी है।
Published on:
04 Oct 2019 05:20 pm
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