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आइएएस अधिकारी के रूप में देश सेवा करना चाहती है किसान की बेटी अंकिता

पिता की खुशी का ठिकाना नहीं था। पिता ने हमेशा सहयोग किया, लेकिन उन्हें ऐसे परिणाम की कल्पना नहीं की थी। वे चाहते हैं कि बेटी हर हाल में आगे की पढ़ाई जारी रखे और इसके लिए वे हर कीमत चुकाएंगे

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जश्न के बीच बंटी मिठाइयां

पिता सहित झूम उठा पूरा गांव

प्री-यूनिवर्सिटी में विज्ञान की पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग और फिर एक IAS अधिकारी के रूप में देश की सेवा करना चाहती है एसएसएलसी की टॉपर (SSLC topper ) अंकिता। उसके माता-पिता की ओर से उसकी पसंद के पाठ्यक्रम या ग्रेड को लेकर कोई दबाव नहीं है। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने भी अंकिता को बधाई दी।

पूरा गांव दरवाजे पर था

Ankita ने बताया कि उसके पिता बसप्पा कोन्नूर वजरामट्टी गांव में एक Farmer हैं। उनके पास छह एकड़ जमीन है। मां गीता एक गृहिणी हैं। वे कभी-कभी अपने पारिवारिक खेत में काम करती हैं। वह छुट्टियों में अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए अपने घर गई थी। उसके स्कूल के शिक्षकों ने उसके पिता को फोन पर जब बेटी की उपलब्धि के बारे में बताया तो घर सहित पूरा गांव खुशी से झूम उठा। देखते ही देखते पूरा गांव उसके दरवाजे पर था। जश्न के बीच मिठाईयां बंट रही थीं।

हर कीमत पर पढ़ाई

अंकिता ने बताया कि उसके पिता की खुशी का ठिकाना नहीं था। पिता ने हमेशा सहयोग किया, लेकिन उन्हें ऐसे परिणाम की कल्पना नहीं की थी। वे चाहते हैं कि बेटी हर हाल में आगे की पढ़ाई जारी रखे और इसके लिए वे हर कीमत चुकाएंगे।

नहीं था मोबाइल फोन

अंकिता ने कहा कि टॉपर बन वह बेहद उत्साहित है, लेकिन उससे ज्यादा उसके शिक्षक और माता-पिता खुश हैं और सभी की खुशी में उसकी खुशी है। छात्रावास में उसके पास मोबाइल फोन की सुविधा नहीं थी। स्कूल में डिजिटल लाइब्रेरी का उपयोग किया। वह अपनी सफलता का श्रेय नियमित पढ़ाई को देती है। वह सुबह करीब 5 बजे उठती थी और कक्षाओं में जाने से पहले दो घंटे तक पढ़ाई करती थी। स्कूल से लौटने के बाद पाठों को दोहराती थी।

शिक्षकों को भी था पूरा भरोसा

शिक्षकों ने सुनिश्चित किया कि उसे सभी आवश्यक किताबें और सामग्रियां मिलें और उसने भी मेहनत करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी।