
देश की पहली हाइजीन बेबी डायपर भोपाल में बनेगी, चीन की निर्भरता होगी कम,स्वदेशी प्रॉडक्ट के प्रोडक्शन का हब अचारपुरा
भोपाल. गोविंदपुरा, मंडीदीप और बगरोदा के बाद अब राजधानी का नया औद्योगिक हब अचारपुरा है। यहां तेजी से नए उद्योग लग रहे हैं। दशकभर पहले यहां पहाडिय़ां थीं आज 80 से ज्यादा फैक्ट्रियां हैं। यहां उत्पादों खासकर कपड़ा की सप्लाई देश-विदेश में हो रही है। यह इंडस्ट्रियल एरिया निर्यात का भी हब बन रहा है। देश की सबसे बड़ी कपड़ा निर्माता कंपनियों में से एक गोकुलदास एक्सपोर्ट में बनने वाले परिधान निर्यात होते हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां एक और मल्टी नेशनल कंपनी का भूमि पूजन किया। इस कंपनी के प्रोडॅक्ट से अचारपुरा का नाम देश-विदेश के क्षितिज पर चमकेगा।
1000 करोड़ का टर्नओवर
अचारपुरा के उद्यमियों के अनुसार राजधानी के आसपास मंडीदीप और गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र और बगरोदा के बाद अब अचारपुरा इमर्जिंग क्षेत्र है। यहां का टर्नओवर 1000 करोड़ से अधिक है। जिसमें 300 करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात हो रहा है।
क्या-क्या सामान बन रहे
अचारपुरा इंडस्ट्रीज क्षेत्र में बेकरी आयटम, पैकेजिंग मटेरियल, दाल और बेसन मिल, इलेक्ट्रिक वायर, डिस्पोजल आयटम, प्रिटिंग सामान, नट-बोल्ड, बिरंजी, बिजली के पाइप और धागा बनते हैं। अचारपुरा क्षेत्र में फेस-1 एवं फेस-2 पर भी काम चल रहा है। पूरे क्षेत्र में उद्योग शुरू होने पर यहां का टर्नओवर कई गुना बढ़ जाएगा।
अचारपुरा की स्थिति
-180 प्लॉट प्रथम फेज में
-100 से ज्यादा फैक्ट्रियां बनकर तैयार
-80 से ज्यादा इकाईयां हो रहीं संचालित
-44 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हो रहा विकास
लोकेशन
-12 किमी दूर भारत टॉकीज से
-10 किमी एयरपोर्ट से दूरी
-4 किमी बायपास से दूरी
50 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
आने वाले दो से तीन सालों में अचारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में करीब 750 छोटे-बड़े उद्योग स्थापित होंगे। इनसे 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। यहां करीब 600 एकड़ भूमि पर अलग-अलग उद्योग स्थापित हो रहे हैं। अलग-अलग कलस्टर भी बनाए जा रहे हैं। ऑल इंडस्ट्रीज ऑफ मंडीदीप एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल के अनुसार अचारपुरा उद्योगों के मामले में काफी आगे आ चुका है। यहां का विकास एक सकारात्मक संकेत है।
निर्यात का हब बनेगा
अचारपुरा में उद्योग क्षेत्र को विकसित हुए करीब एक दशक हुआ है। यहां बड़ी संख्या में उद्योग शुरू हो चुके हैं और नई-नई कंपनियां आ रही हैं। सडक़, बिजली, पानी की कोई परेशानी नहीं है। जल्द ही यह क्षेत्र निर्यात के मामले में भी काफी आगे बढ़ जाएगा।
नवदीप सिंह, प्रवक्ता, अचारपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
बच्चों के डायपर में इस्तेमाल सामग्री अचारपुरा में बनेगी
अचारपुरा में ओबीटी ग्रुप और जर्मनी की कंपनी के संयुक्त उपक्रम की वूवन फैब्रिक यूनिट का भूमिपूजन हुआ। कंपनी यहां करीब 125 करोड़ रुपण् का निवेश करेगी। भोपाल में यह कंपनी ऐसा प्रोडक्ट बनाएगी जो पहले भारत में कहीं नहीं बनता था। कंपनी बच्चों के डायपर के लिए आवश्यक सामग्री बनाएगी तो अभी तक चीन से आयात की जाती है। यूनिट सितंबर 2025 तक प्रोडक्शन शुरू करेगी। भविष्य में यहां करीब 1000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। करीब 250 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
और क्या बनाएगी कपंनी
कपंनी नॉन वूवन हाइजीन उत्पाद जैसे एडीएल, टॉप सीट, और बैक सीट का उत्पादन करेगी, इसका इस्तेमल बेबी डायपर बनाने में होता है। इसके अलावा इस यूनिट में फ्लोर कवरिंग, फ्लेट फ्लोर कवरिंग, डोमेस्टिक फेल्टस, ऑटोमोटिव फेल्टस, रेंडम वेलर, ट्रंकलाइनर्स, हेड लाइनर्स, कार्पेट बेकिंग, डेशबोर्डस, अकॉस्टिक इंसुलेशन आदि का निर्माण होगा।
यह भी खास
यह पूरी तरह से ग्रीन यूनिट है। उत्पादन में कोई भी बॉयलर का इस्तेमाल नहीं होगा, जिससे वायु और जल प्रदूषण की समस्या नहीं होगी। हरित औद्योगीकरण की दिशा में यह एक मॉडल है।
बैरसिया क्षेत्र की बनेगी अलग पहचान
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने इस मौके पर कहा कि बैरसिया क्षेत्र की पहचान उत्कृष्ट खेती के लिए है अब यह औद्योगिक केंद्र के रूप में भी उभर रहा है।
100 साल पुरानी है टीडब्ल्यूई-ओबीटी
टीडब्ल्यूई-ओबीटी प्रा.लि. 100 वर्ष पुराना बहुराष्ट्रीय कंपनी है। इसका मुख्यालय जर्मनी में है। यह नॉन वूवन फैब्रिक, टेक्निकल टैक्सटाइल, फर्नीचर, और चाय के क्षेत्र में कार्यरत है।
Published on:
28 Aug 2024 11:03 pm
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