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गुजरात में चार साल में 1063 विद्यार्थियों ने की आत्महत्या

आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में साल-दर-साल इजाफा हो रहा है। देश और गुजरात में बढ़ती विद्यार्थी की आत्महत्याओं की घटनाओं को चिंताजनक बताते हुए गुजरात प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने राज्य व केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है।

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NCRB and Congress

गुजरात प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (फाइल फोटो )

Ahmedabad: री-नीट से तीन दिन पहले अहमदाबाद में री-नीट की तैयारी करने वाले एक छात्र ने छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि गुजरात में पिछले चार वर्षों में 1063 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की है।

हैरानी की बात यह है कि आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में साल-दर-साल इजाफा हो रहा है। देश और गुजरात में बढ़ती विद्यार्थी की आत्महत्याओं की घटनाओं को चिंताजनक बताते हुए गुजरात प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने राज्य व केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बताती है कि राज्य व देश में शिक्षा, रोजगार और भविष्य को लेकर युवाओं में कितनी निराशा है।

डॉ. दोशी ने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि देश में औसतन प्रतिदिन 40 से अधिक बच्चे और किशोर आत्महत्या कर रहे हैं। वहीं, इसी अवधि में 30 वर्ष से कम आयु के 12,598 युवाओं ने परीक्षा में असफलता के कारण अपनी जान दे दी। उनके अनुसार, ये केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हर संख्या के पीछे किसी परिवार का दर्द, माता-पिता का टूटा सपना और एक युवा का अधूरा भविष्य छिपा है।

पेपर लीक व अन्य अनियमितताओं से टूट रहा विश्वास

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में नीट, जेईई मेन्स, सीयूईटी, जीपीएससी और यूपीएससी सहित कई परीक्षाओं में पेपर लीक होने और गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं। विद्यार्थी वर्षों तक मेहनत करते हैं, परिवार लाखों रुपए खर्च करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताएं उनके विश्वास को तोड़ रही हैं।

वर्ष 2024-25 में सबसे अधिक आत्महत्या

एनसीआरबी के आंकड़ों बताते हैं कि गुजरात में वर्ष 2020-21 में 151, वर्ष 2021-22 में 161, वर्ष 2023-24 में 183 और वर्ष 2024-25 में 568 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की। 2023-24 की तुलना में 2024-25 में आंकड़ा काफी बढ़ा है।

सख्त कानून बनाने और लागू करने की मांग

गुजरात प्रदेश कांग्रेस ने मांग की है कि पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के मामले में सख्त कानून बनाया जाए। इतना ही नहीं उसे लागू भी किया जाए। सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र तथा हेल्पलाइन शुरू की जाए। भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं के लिए पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाए, ताकि किसी विद्यार्थी को निराशा के कारण अपनी जिंदगी न गंवानी पड़े।