25 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्कूल शिक्षा के साथ स्वास्थ्य शिक्षा भी जरूरी

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम में केलदीमठ ने कहा हुब्बल्ली. स्कूल शिक्षा विभाग के उपनिदेशक एस.एस. केलदीमठ ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के समग्र विकास के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विभाग ने खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और स्वास्थ्य कार्यक्रमों को स्कूल समय-सारिणी […]

less than 1 minute read
Google source verification
Health education is also important along with school education

मालमड्डी के के.आई. बोर्ड उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को आयोजित राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के उपनिदेशक एस.एस. केलदीमठ।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम में केलदीमठ ने कहा

हुब्बल्ली. स्कूल शिक्षा विभाग के उपनिदेशक एस.एस. केलदीमठ ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के समग्र विकास के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विभाग ने खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और स्वास्थ्य कार्यक्रमों को स्कूल समय-सारिणी में शामिल किया है, ताकि बच्चों की समग्र प्रतिभा और विकास को बढ़ावा मिल सके।

वे मालमड्डी के के.आई. बोर्ड उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को जिला प्रशासन, जिला पंचायत, स्कूल शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान बोल रहे थे।

केलदीमठ ने कहा कि कृमि से ग्रसित बच्चे कुपोषण और रक्ताल्पता से पीडि़त होते हैं, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक वृद्धि प्रभावित होती है। इसी कारण सभी सरकारी, अनुदानित, अनुदानरहित और निजी स्कूलों के प्रत्येक बच्चे को वर्ष में दो बार अल्बेंडाजोल (कृमि निवारक) गोली दी जाती है।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एम. होनकेरी ने बच्चों के लिए खुराक का विवरण दिया। 1 से 2 वर्ष के बच्चों को आधी गोली पाउडर करके पानी के साथ, 2 से 3 वर्ष को एक पूरी गोली पाउडर करके, और 3 से 19 वर्ष के बच्चों को एक पूरी गोली पानी के साथ देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह गोली शुद्ध पानी के साथ चबाकर और निगलकर दी जानी चाहिए, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, कुपोषण कम होता है और एकाग्रता व कार्य क्षमता में सुधार होता है।

धारवाड़ जिले में 1,555 स्कूल-कॉलेजों के लिए 4,39,779 अल्बेंडाजोल गोलियों की आवश्यकता थी, जबकि 4,55,065 गोलियां उपलब्ध हैं। कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक और छात्र उपस्थित थे।