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इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, इन गांवों से होकर गुजरेगा

mp news: करीब 19.5 किलोमीटर लंबे इस हाई स्पीड कॉरिडोर को लगभग 300 फीट चौड़ा बनाया जा रहा है, यह मार्ग इंदौर एयरपोर्ट के समीप से शुरू होकर पीथमपुर में एबी रोड से जुड़ेगा।

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mp news: मध्यप्रदेश के इंदौर और धार जिले के पीथमपुर के बीच बन रहे इकोनॉमिक कॉरिडोर का काम तेज गति से जारी है। इस इकोनॉमिक कॉरिडोर को मालवा क्षेत्र के औद्योगिक विकास का गेम चेंजर माना जा रहा है। करीब 19.5 किलोमीटर लंबे इस हाई स्पीड कॉरिडोर को लगभग 300 फीट चौड़ा बनाया जा रहा है। यह मार्ग इंदौर एयरपोर्ट के समीप से शुरू होकर पीथमपुर में एबी रोड से जुड़ेगा, जिससे दोनों शहरों के बीच आवागमन बेहद आसान हो जाएगा।

20 मिनट में पूरा होगा इंदौर से पीथमपुर का सफर

परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर से पीथमपुर पहुंचने में लगने वाला लगभग 40 मिनट का समय घटकर करीब 20 मिनट रह जाएगा। यह कॉरिडोर केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके दोनों ओर आधुनिक औद्योगिक और शहरी विकास भी किया जाएगा। मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम ने इसके लिए मास्टर प्लान तैयार कर भूमि अधिग्रहण और लैंड पूलिंग की प्रक्रिया तेज कर दी है।

ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट की तर्ज पर विकास

एमपीआईडीसी के कार्यकारी उपसंचालक हिमांशु प्रजापति के अनुसार, यह परियोजना ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल पर आधारित है। पूरे कॉरिडोर के दोनों ओर लगभग 300 मीटर क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय विकास किया जाएगा। यहां आईटी पार्क, डाटा सेंटर, फिनटेक सिटी, कमर्शियल हब, स्कूल, अस्पताल और रिहायशी टाउनशिप विकसित करने की योजना है। करीब 2500 करोड़ की लागत से बनने वाली यह परियोजना इंदौर और पीथमपुर के बीच एक आधुनिक औद्योगिक बेल्ट तैयार करेगी, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। अनुमान है कि इससे लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है।

इन गांवों से होकर गुजरेगा कॉरिडोर

इकोनॉमिक कॉरिडोर नैनोद, कोडियाबर्डी, रिंजलाय, बिसनावदा, नावदा पंथ, श्रीराम तलावली, सिन्दोड़ा, शिवखेड़ा, नारलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, टीही और धन्नड़ सहित कई गांवों से होकर गुजरेगा और अंतत: पीथमपुर के एबी रोड से जुड़ेगा।परियोजना में शामिल 17 गांवों की भूमि में से अब तक 300 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर किसानों की सहमति मिल चुकी है। प्रशासन का लक्ष्य अगले 2-3 वर्षों में कॉरिडोर का निर्माण पूरा करना है।