
जयपुर। हेलमेट और कागज पूरे होने चाहिए, रोड कैसा भी हो सरकार को कोई मतलब नहीं ! राजधानी की सड़कों पर कुछ ऐसे ही नजारें देखे जा सकते हैं। हर प्रमुख सड़क पर यातयात पुलिस कर्मी यातायात नियमों की अवहेलना करने वाले लोगों के चालान करते देखे जा सकते हैं। वाहन चालकों और उनमें सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए यह भी जरूरी है। लेकिन टूटी सड़कें किस तरह वाहन चालकों के लिए कमर तोड और मच्छर जनित बीमारियों का कारण बन रही है, इसे देखने की फुर्सत नगरीय विकास विभाग व प्रशासन के अधिकारियों को नहीं है।
गढढोंयुक्त टूटी सड़कें कमर तोड़ ही नहीं, बल्कि आने वाले सितंबर और अक्टूबर माह में घातक बीमारी की डेंगू का कारण भी बन सकती हैं। डेंगू के मच्छर को पनपने के लिए ठहरा हुआ जमा पानी सबसे उपयुक्त रहता है। बरसात के समय इन गढ़ढों में पानी जमा होता है तो कई बार उसकी सफाई कई दिनों तक नहीं होती। ऐसे में यहां डेंगू का मच्छर उत्पन्न होकर आस-पास की आबादी को चपेट में ले सकता है। बीते कुछ वर्ष के आंकड़ों को देखें तो जयपुर सहित प्रदेश के कई जिले इस बीमारी के लिहाज से संवेदनशील रहते आए हैं।
विभाग बना रहे कागजी योजनाएं
टूटी सड़कों को दुरुस्त रखने का काम नगरीय विकास विभाग (यूडीएच) और इसके कारण बीमारियां पनपने की आशंका से यूडीएच को आगाह करने का काम चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का है। राज्य में पिछले कई वर्ष से करीब करीब हर वर्ष डेंगू बीमारी घातक रूप दिखाती है। लेकिन इसके बावजूद बरसात से पहले टूटे गढढों को भरने या सड़कों को ठीक करने पर पुख्ता काम करने के बजाय सिर्फ कागजी इंतजाम किए जा रहे हैं।
प्रदेश में 1324 मरीज, इनमें 244 जयपुर के
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में इस वर्ष डेंगू के 1324 मरीज रिपोर्ट किए जा चुके हैं। जिनमें 244 जयपुर और जयपुर ग्रामीण जिले के हैं। जयपुर के बाद सर्वाधिक 238 मरीज बीकानेर जिले के हैं। डेंगू के लिहाज से टॉप फाइव जिलों में जयपुर और बीकानेर के बाद उदयपुर 72, बूंदी 55 और कोटा के 51 मरीज हैं।
Published on:
09 Aug 2024 12:38 pm
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