scriptआइवीएफ को लेकर हिचक, 35 ने बढ़ाया आगे कदम और 31 बनी मां | Hesitant about IVF, 35 took the step forward and 31 became mothers | Patrika News
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आइवीएफ को लेकर हिचक, 35 ने बढ़ाया आगे कदम और 31 बनी मां

-जिला अस्पताल की रोशनी क्लीनिक में बांझपन से पीडि़त महिलाएं हो रही चिंहित, आइवीएफ को लेकर नहीं जागरुक
-शासन स्तर से मुफ्त में दी जा रही सुविधाओं का नहीं उठा रहे लाभ

दमोहJul 10, 2024 / 12:04 pm

आकाश तिवारी

-जिला अस्पताल की रोशनी क्लीनिक में बांझपन से पीडि़त महिलाएं हो रही चिंहित, आइवीएफ को लेकर नहीं जागरुक
-शासन स्तर से मुफ्त में दी जा रही सुविधाओं का नहीं उठा रहे लाभ
दमोह. बुंदेलखंड में बांझपन की समस्या अब धीरे-धीरे कॉमन होती जा रही है। इससे दमोह जिला भी अछूता नहीं है। हालांकि आधुनिक युग में इसका इलाज है। आइवीएफ तकनीक से बांझपन से निजात मिल सकती है, लेकिन इसको लेकर महिलाओं में झिझक दिख रही है। जिला अस्पताल के आंकड़ों को देखे तो २०१८ से अब तक महज ३५ प्रकरण ही आइवीएफ के भेजे गए थे। इनमें से ३१ आइवीएफ से मां बनी हैं। जबकि शासन की तरफ से यह इलाज पूरी तरह से फ्री है।
समान्य मरीजों के लिए यह इलाज काफी मंहगा है। आइवीएफ पर एक बार में दो से तीन लाख रुपए खर्च होते हैं। गारंटी भी नहीं होती कि एक बार में सफलता मिले। इधर, शासन स्तर से भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए प्रदेश में चिंहित ४ हॉस्पिटल में टेस्ट्यूब बेबी की सुविधा दी है।
-रोशनी क्लीनिक है संचालित
जिला अस्पताल में हर मंगलवार को रोशनी क्लीनिक संचालित हो रही है। इसमें ऐसी महिलाएं पहुंच रही हैं, जिन्हें बच्चे नहीं हो रहे हैं। उनका स्त्रीरोग विशेषज्ञ अपने स्तर पर इलाज करती हैं। पहली बार जांच कराने पहुंच रही महिलाओं का लगभग एक साल इलाज के बाद आइवीएफ प्रकरण बनाया जाता है। लेकिन यदि किसी का इलाज एक साल से चल रहा है और उसे फायदा नहीं हुआ तो यहां पर सीधे उनका प्रकरण बनाया जाता है।
-जागरुकता की कमी या प्रचार-प्रसार न होना
२०१८ से अभी तक ३५ प्रकरण चिंहित अस्पतालों में भेजे गए हैं, जहां पर आइवीएफ से इलाज हुआ है। हालांकि इनमें से ४ केस में पहली बार में आइवीएफ सफल नहीं रहा। इन महिलाओं ने दूसरी बार आवेदन किया था। यदि ४ साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो करीब २०० से अधिक महिलाओं ने अपनी जांच कराई। अधिकांश में बांझपन की शिकायत मिली थी। प्रकरण कम बनने के पीछे की बड़ी वजह दोबारा महिलाओं का इलाज नहीं कराना बताया जा रहा है।
-इन अस्पतालों में है आयुष्मान से आइवीएफ इलाज
एक साल पहले तक सिर्फ भोपाल के बंसल अस्पताल में टेस्ट्यूब बेबी की सुविधा थी। जिला अस्पताल से भेजे जाने वाले प्रकरणों में सिर्फ इसी अस्पताल में महिलाओं का इलाज होता था। हालांकि उस समय प्रकरण इक्का-दुक्का ही थे, लेकिन अब अस्तपालों की संख्या बढ़कर ४ हो गई है। इंदौर केे अरविंदो अस्पताल, आइवीएफ सेंटर भोपाल, होशंगाबाद का न्यू पांडेय हॉस्पिटल भी शामिल कर दिए गए हैं।
बांझपन के मुख्य कारण:-
महिलाओं में बांझपन के कई कारण हो सकते हैं। यह समस्या महिलाओं में गर्भाशय के किसी अंगियों की समस्या, श्वेत प्रदर या अनियमित मासिक धर्म से संबंधित हो सकती है। अन्य कारणों में हॉर्मोनल असंतुलन, रोग, शराब और नशीली दवाओं का उपयोग, उत्पादक विकार और उम्र के साथ होने वाली सामान्य प्राकृतिक प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।

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