
horoscope 2019
राधाजी श्री लक्ष्मी की ही स्वरूप हैं। इनकी पूजा से धन-धान्य व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। राधा नाम के जाप से श्रीकृष्ण भी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण की प्राणप्रिया राधाजी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 29 अगस्त को मनाया जाएगा। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार राधाजी भी श्रीकृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं। वे बृज में वृषभानु वैश्य की कन्या थीं। उनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ बल्कि माता कीर्ति ने अपने गर्भ में वायु को धारण कर रखा था और योगमाया की प्रेरणा से कीर्ति ने वायु को जन्म दिया। शास्त्रों की मानें तो ब्रह्माजी ने पुण्यमय वृन्दावन में श्रीकृष्ण के साथ साक्षात राधा का विधिपूर्वक विवाह संपन्न कराया था। कहते हैं कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए पहले राधारानी को जपना पड़ता है।
कृष्ण की पूजनीय हैं राधा
राधाजी कृष्ण की प्रेयसी हैं, वे श्री कृष्ण के वक्ष:स्थल में वास करती हैं। ये दोनों परस्पर आराध्य और आराधक हैं अर्थात दोनों एक दूसरे के इष्ट देवता हैं। शास्त्रों के अनुसार पहले राधा नाम का उच्चारण करने के बाद कृष्ण नाम का उच्चारण करना चाहिए। इस क्रम का उलटफेर करने पर प्राणी पाप का भागी होता है। एक बार भगवान शंकर ने श्रीकृष्ण से पूछा कि प्रभो, ‘आपके इस स्वरूप की प्राप्ति कैसे हो सकती है?’
श्रीकृष्ण ने उत्तर में कहा कि हे रूद्र, ‘मेरी प्रिया राधा का आश्रय लेकर ही तुम मुझे अपने वश में कर सकते हो अर्थात मुझे प्रसन्न करना है तो राधा रानी की शरण में जाओ।’ शास्त्रों में राधाजी की पूजा को अनिवार्य मानते हुए कहा है कि राधाजी की पूजा न की जाए तो भक्त श्रीकृष्ण की पूजा का अधिकार भी नहीं रखता और न ही उनकी कृपा का अधिकारी बन पाता है।
राधे रानी को करें प्रसन्न
इस दिन व्रत रखकर यथाविधि राधाजी की पूजा करनी चाहिए व श्री राधामन्त्र ‘ॐ राधायै स्वाहा:’ का जाप करना चाहिए। राधाजी श्री लक्ष्मी का ही स्वरूप हैं अत: इनकी पूजा से धन-धान्य व ऐश्वर्य प्राप्त होता है। राधा नाम के जाप से श्री कृष्ण जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। नारद पुराण के अनुसार राधाष्टमी व्रत करने से प्राणी बृज का रहस्य जान लेता है तथा राधा परिकरों में निवास करता है।
Published on:
28 Aug 2017 03:59 pm
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