
तिरुचि. जिले की 18 साल की एक आदिवासी लडक़ी ने एनआईटी में प्रवेश लेकर गर्व का काम किया है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आदिवासी समुदाय की लडक़ी रोहिणी ने जेईई क्रैक कर दिया है। वह अब राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुचि में प्रवेश लेने ला जा रही है। रोहिणी का जीवन उन बच्चों की तरह नहीं है, जिन्हें महंगी कोचिंग और तमाम सुविधाएं मिलती हैं, तब जाकर ऐसी परीक्षाएं पास कर पाते हैं। रोहिणी साधारण ग्रामीण परिवेश की है। उसके पास एक छोट सा पक्का मकान जरूर है, मगर खाना अभी भी उनके घर में चूल्हे पर ही पकता है।
विपरीत स्थिति भी नहीं रोक पाई
वह अपने खेतों में काम करती है। खेत में निंराई, बोवनी का काम करती है। इस बीच में वह वक्त निकालकर पढ़ाई भी करती है। छोटे से गांव से निकलकर वह इस मुकाम तक पहुंची है। रोहणी शहरों में सुविधाओं से लैस बच्चों के लिए एक मिसाल है। अभाव में भी लडक़ी ने इतनी बड़ी परीक्षा पास कर ली है। रोहिणी ने जेईई मेन परीक्षा में 73.8 फीसदी अंक हासिल किए हैं इसलिए उसे एनआईटी के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में सीट मिल गई है।
सरकार ने की मदद
रोहिणी ने पढ़ाई में मदद करने के लिए अपने शिक्षकों को भी धन्यवाद दिया है। उसने ये भी बताया कि तमिलनाडु राज्य सरकार ने फीस भरने में उसकी मदद की थी और इसके लिए उसने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का आभार जताया। रोहिणी ने बताया है कि उसने कहा, मैं एक आदिवासी समुदाय की छात्रा हूं। मैं जेईई परीक्षा में शामिल हुई और 73.8 प्रतिशत अंक हासिल किए। मैंने एनआईटी तिरुचि में एक सीट हासिल की है और मैंने केमिकल इंजीनियरिंग का ऑप्शन चुना है।
मजदूर हैं माता-पिता
रोहिणी ने बताया कि उसने अपने प्रधानाध्यापक और अपने स्कूल के कर्मचारियों की वजह से अच्छा प्रदर्शन किया है। रोहिणी की सफलता खास और अलग है क्योंकि वह वंचित परिस्थितियों से आती है। उसके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और उसका घर चिन्ना इलूपुर गांव में स्थित है। अपने रोजाना के संघर्ष के बारे में उसने कहा कि प्रवेश परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ उसने दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम भी किया।
Updated on:
10 Jul 2024 04:04 pm
Published on:
10 Jul 2024 04:01 pm
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