
नोटिस के बाद कितने डॉक्टरों ने पंजीयन कराया विभाग के पास इसकी जानकारी भी नहीं
शहडोल. जिले में झोलाछाप डॉक्टर व अवैध क्लीनिक संचालक मरीजों की जान से खिलवाड़ कर इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह अवैध क्लीनिक संचालित की जा रही है। वहीं झोलाछाप डॉक्टर भी ग्रामीण क्षेत्रों में घूम-घूमकर इलाज कर रहे हैं। विभाग के पास ऐसे डॉक्टर व क्लीनिक संचालकों का कोई डाटा तैयार नहीं है। स्वास्थ्य संचालनालय के निर्देश के बाद विभाग ने झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई करने चार सदस्यीय टीम गठित कर दी, जो अब अंधेरे में तीर मार रही है। टीम दिन भर के भ्रमण के बाद एक भी कार्रवाई नहीं कर पा रही, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बीते करीब एक सप्ताह में सिर्फ 4 कार्रवाई की गई है वह भी मुख्यालय में। जिन्हें नोटिस जारी किया गया है। जबकि अधिकारी खुद मानते हैं कि जिले में फर्जी डॉक्टरों की भरमार है, जो मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। गुरुवार को कमिश्नर ने भी फर्जी डॉक्टरों के विरुद्ध सूचि तैयार कर सख्त कार्रवाई करने निर्देश जारी किए हैं।
कार्रवाई के पहले दफ्तर में गायब हो गई सूची
स्वास्थ्य विभाग कुछ दिनों पहले जिले भर के करीब डेढ़ सौ से अधिक फर्जी डॉक्टरों की सूची तैयार की थी, कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय भी भेजा गया था। बाद में यह सूची स्वास्थ्य विभाग से गायब हो गई। वहीं अधिकारियों को भी गुमराह कर दिया गया। स्वास्थ्य संचालनालय के निर्देशन के बाद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार हरकत में आ गए और टीम गठित कर नए सिरे से कार्रवाई करने लगे। जबकि विभाग के पास जिले भर के सभी फर्जी डॉक्टरों की एक-एक जानकारी है, पूर्व के अधिकारी भी बिना पंजीयन व रजिस्ट्रेशन के क्लीनिक संचालित करने वालों की बकायदा सूची तैयार कराई थी।
16 डॉक्टरों को पंजीयन के लिए जारी नोटिस में भी उठे सवाल
स्वास्थ्य विभाग ने बिना पंजीयन व रजिस्ट्रेशन के क्लीनिक संचालन करने वाले 16 डॉक्टरों को रजिस्ट्रेशन कराने गत माह नोटिस जारी किया था। रजिस्ट्रेशन के नाम पर दबाव की भी बात चर्चा में है। बाद में कुछ का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया था, जबकि वे पूरी गाइड लाइन का पालन भी नहीं कर रहे हैं। हाल ही में पंजीयन के बाद स्वीकृति वाले नर्सिंग होम व डॉक्टरों के क्लीनिक की जांच हो तो दर्जनों खामियां उजागर हो जाएंगी। अधिकारियों से मुलाकात न करने वाले कुछ डॉक्टरों की क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन को नियम निर्देशों में उलझा दिया गया है। जिससे एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। आज भी चिकित्सक पंजीयन कराने विभाग के चक्कर काट रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पंजीयन कराने नोटिस जारी तो कर दिए लेकिन उन्हें खुद पता नहीं अब तक कितने चिकित्सकों ने पंजीयन करा लिया है और कितने ने नहीं।
फर्जी क्लीनिक में इस तरह करनी है जांच
जानकारों ने बताया कि फर्जी तरीके से संचालित क्लीनिक में पंजीयन, राजिस्ट्रेशन, डॉक्टर की डिग्री, प्रदूषण बोर्ड के सार्टिफिकेट के साथ ही डॉक्टर अपनी डिग्री के अनुसार मरीजों का उपचार कर रहा है या नहीं। किस विधा में मरीजों का उपचार किया रहा है जैसी कई प्रकार की जांच स्वास्थ्य विभाग को करनी है। इसके साथ कमियां पाए जाने पर क्लीनिक सील करने के साथ ही वैधानिक कार्रवाई की जानी है। लेकिन स्वास्थ्य की गठित टीम अबतक की कार्रवाई में सिर्फ नोटिस तक ही सीमित है।
इनका कहना
फर्जी डॉक्टरों की सूची तैयार नहीं है, कार्रवाई के लिए टीम गठित की गई है। कुछ क्लीनिक संचालकों पर कार्रवाई भी हुई है, बिना पंजीयन के क्लीनिक संचालन करने वाले 16 डॉक्टरों को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन जानकारी नहीं है कितने लोगों ने पंजीयन करा लिया है।
डॉ. एके लाल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी।
Published on:
20 Jul 2024 12:03 pm
बड़ी खबरें
View Allसमाचार
ट्रेंडिंग
