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आरएलवी के तीसरे लैंडिंग परीक्षण की तैयारी में इसरो

चित्रदुर्ग के चल्लकेरे में होगा तीसरा और आखिरी परीक्षण

बैंगलोरJun 15, 2024 / 07:24 pm

Rajeev Mishra

चित्रदुर्ग स्थित चल्लकेरे एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज (एटीआर) में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पुन: उपयोगी प्रक्षेपण यान (आरएलवी, पुष्पक) के तीसरे लैडिंग परीक्षण (आरएलवी एलईएक्स-03) की तैयारी कर रहा है। मौसम अनुकूल रहा तो कुछ ही दिनों में यह परीक्षण हो जाएगा। मिशन की तैयारियों की समीक्षा करने वाली समिति (एमआरआर) ने हरी झंडी दे दी है और अब मौसम तथा परिस्थितियों के अनुकूल होने का इंतजार है।
इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक तीसरे चरण में परीक्षण मानदंडों को और कड़ा कर दिया गया है। आरएलवी का 4 किमी की ऊंचाई किया जाने वाला संभवत: यह आखिरी लैंडिंग परीक्षण होगा। अगले चरण में इसे पृथ्वी की 400 किमी वाली कक्षा से लैंड कराने की कोशिश होगी। तीसरे चरण में फिर एक बार डेल्टा विंग वाले आरएलवी (पुष्पक) को भारतीय वायुसेना के विमान चिनूक से लगभग 4.5 किमी ऊंचाई से गिराया जाएगा। यान के समक्ष ऐसी परिस्थितियां पैदा की जाएंगी कि, उसे क्रॉस-रेंज और डाउन-रेंज काफी कठिन मैनुवर करते हुए स्वचालित तरीके से रन-वे पर लैंड करना होगा। इस दौरान वह स्वचालित नेविगेशन प्रणाली का उपयोग करेगा और स्वत: रन-वे का रुख करेगा। पुष्पक का विकास विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) तिरुवनंतपुरम ने किया है।
ओआरवी की भी तैयारियां शुरू
इसरो अधिकारियों के मुताबिक आरएलवी के अगले चरण का परीक्षण मानव रहित कक्षीय री-एंट्री व्हीकल (ओआरवी) का होगा। इसमें पुष्पक का आकार लगभग डेढ़ गुणा से अधिक बढ़ जाएगा। उसे जीएसएलवी के एक नए मॉडल के जरिए धरती से 400 किमी की ऊंचाई वाली पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाएगा और वहां से सॉफ्ट लैंडिंग कराई जाएगी। लेकिन, इस मिशन में अभी कम से कम दो साल लगेंगे। इसके लिए पुष्पक को घर्षण से बचाने के लिए तापीय कवच प्रणाली से लैस किया जाएगा और लैंडिंग गियर को भी बेहतर किया जाएगा। इसरो ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है।
भारत अमरीका के स्पेस शटल की तर्ज पर इस पुन: उपयोगी यान का विकास कर रहा है। इससेे उपग्रहों को अंतरिक्ष में छोड़ा जा सकेगा। उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाकर यह यान पुन: धरती पर लौट आएगा और उसका अन्य मिशनों में भी उसका उपयोग किया जा सकेगा। यह अंतरिक्ष कार्यक्रमों में रॉकेटों पर आने वाले भारी खर्च की लागत घटाने में मददगार साबित होगा।

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