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जीरा उत्पादन में जैसलमेर अगाड़ी, मूल्य संवर्धन में पिछाड़ी

सीमांत जैसलमेर जिला जीरा उत्पादन के लिहाज से राजस्थान के प्रमुख क्षेत्रों में शुमार है। थार की शुष्क जलवायु, रेतीली दोमट मिट्टी, ट्यूबवैल और इंदिरा गांधी नहर परियोजना से उपलब्ध सिंचाई ने यहां जीरे की खेती को मजबूती दी है।

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सीमांत जैसलमेर जिला जीरा उत्पादन के लिहाज से राजस्थान के प्रमुख क्षेत्रों में शुमार है। थार की शुष्क जलवायु, रेतीली दोमट मिट्टी, ट्यूबवैल और इंदिरा गांधी नहर परियोजना से उपलब्ध सिंचाई ने यहां जीरे की खेती को मजबूती दी है। जिले में बड़ी संख्या में किसान जीरा उत्पादन कर रहे हैं। इसके बावजूद जैसलमेर में जीरा प्रसंस्करण उद्योग का अभाव किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। गौरतलब है कि किसी उत्पाद या सेवा में अतिरिक्त प्रक्रियाएं या सुविधाएं जोडकऱ उसके मूल्य और बाजार कीमत को बढ़ाने की प्रक्रिया से वह ग्राहकों के लिए अधिक आकर्षक और विक्रेताओं के लिए लाभदायक बन जाती है। जैसलमेर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान में उत्पादित अधिकांश जीरा कच्चे रूप में ही बाहरी क्षेत्रों विशेषकर गुजरात, भेज दिया जाता है। स्थानीय स्तर पर सफाई, ग्रेडिंग, पॉलिशिंग, पिसाई और पैकेजिंग जैसी सुविधाएं नहीं होने के कारण किसान मूल्य संवर्धन से वंचित रह जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जीरे का प्रसंस्करण जिले में ही हो, तो किसानों को 20 से 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त आय मिल सकती है।

रकबा बढ़ रहा, सुविधाएं नहीं

  • जिले में जीरा उत्पादन का रकबा लगभग हर वर्ष बढ़ रहा है, लेकिन प्रसंस्करण इकाइयों, स्टोरेज और आधुनिक मंडी सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया है।
  • वर्तमान में किसान फसल कटाई के बाद जीरा स्थानीय व्यापारियों या दलालों को बेचने को मजबूर हैं। इसके बाद यही जीरा गुजरात की ऊंझा जैसी बड़ी मंडियों में पहुंचकर प्रसंस्करण और निर्यात के बाद कई गुना कीमत पर बिकता है।
  • राजस्थान की तुलना में गुजरात ने जीरा व्यापार और प्रसंस्करण को व्यवस्थित रूप से विकसित किया है। वहां बड़े स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट, मसाला पार्क, निर्यात आधारित उद्योग और सशक्त मंडी नेटवर्क मौजूद हैं। इसका सीधा लाभ किसानों और स्थानीय रोजगार को मिलता है। - जैसलमेर में यदि इसी तर्ज पर छोटे और मध्यम स्तर की प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना हो, तो जिले की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।
  • जानकारों के अनुसार जैसलमेर में जीरा प्रसंस्करण के लिए कच्चे माल की कोई कमी नहीं है। साथ ही भूमि की उपलब्धता, सौर ऊर्जा की संभावनाएं और श्रम बल इस क्षेत्र को औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल बनाते हैं। आवश्यकता है तो केवल सरकारी प्रोत्साहन, निजी निवेश और आधारभूत ढांचे के विकास की।अगर प्रयास किए जाएं तो…जिले में जीरा आधारित फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर या मसाला पार्क की स्थापना होती है, तो इससे न केवल किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। इसके साथ ही निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी और जैसलमेर की पहचान केवल पर्यटन तक सीमित न रहकर कृषि आधारित उद्योगों तक विस्तारित हो सकेगी। प्रगतिशील किसान विजय बिस्सा के अनुसार जैसलमेर में जीरा प्रसंस्करण की संभावनाएं अपार हैं। आवश्यकता इस बात की है कि उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और विपणन पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए।