
कृषि उपज मंडी कुसमेली जिन किसानों से गुलजार है, उन किसानों को मंडी में वे व्यवस्थाएं नहीं मिलती जिनके वे हकदार हैं। उसके लिए भी उन्हें मोहताज रहना पड़ता है। खास तौर पर मंडी के शेडों में उनकी उपज को जगह नहीं मिलती। कारण सिर्फ मंडी प्रबंधन की लचर कार्यप्रणाली है। उल्लेखनीय है कि मंडी में पहुंचने वाले किसानों को पाला, खंजर, तौल सहित सारे खर्च देने के बाद किसान को 10 रुपए बोरी भुगतान के समय भी कटवाना पड़ता है। इसे सुविधा शुल्क कहें या मंडी टैक्स, सभी प्रकार के वैध एवं अवैध खर्चों की कटौती किसान से ही की जाती है। लेकिन, यदि किसान को भोजन से लेकर, विश्राम कक्ष एवं शेड की सुविधा की बात की जाए तो इन सभी में भी उसे समझौता ही करना पड़ता है। पत्रिका ने जब किसानों से बात की तो कुसमेली मंडी प्रबंधन की कलई खुल कर सामने आ गई।
इन दिनों न तो गेहूं का सीजन है और न ही मक्का का, लेकिन एक माह बाद दशहरा के बाद से ही मक्का की फसल की कटाई होने लगेगी, इसके साथ ही मक्का की आवक जमकर होने लगेगी। ऐसे में मंडी में किसानों को अपना ही अनाज बेचने के लिए शेड की किल्लत होने लगेगी, जबकि मंडी में शेड किसानों के लिए ही आरक्षित होता है। किसान की उपज व्यापारी की बोरियों में तुलने के बाद 24 घंटे के अंदर उसका उठाव होना चाहिए। ताकि अगले दिन के लिए शेड पूरी तरह खाली हो सके।
मेरे बड़े भाई ने मंडी में 30 बोरी गेहूं बेचा, तो खरीदार ने भुगतान करते समय 10 रुपए बोरी काट लिया। 300 रुपए काटने का कारण मंडी अधिकारी के समक्ष मांगा गया तो कारण बताने की जगह पैसे वापस करने लगे, साथ ही जो नीलामी करवाने वाले कर्मी 100-50 रुपए देकर ही किसान को पर्ची देते हैं। आखिर व्यापारी 10 रुपए प्रति बोरी किस बात की ले रहे हैं।
नरेश ठाकुर
हम अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचते हैं तो शेड में जगह नहीं मिलती। सप्ताह के पहले दिन किसान की उपज शेड में रहती है उसके बाद के 4 दिनों तक व्यापारियों की बोरियां लगी रहती है, जबकि हर दिन किसानों को उनकी उपज की नीलामी के पहले शेड की व्यवस्था मिलनी चाहिए। किसान की उपज भुगतान मिलने तक शेड में सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी मंडी की है।
विजय सूर्यवंशी
मंडी में भुगतान के समय अतिरिक्त राशि काटने की शिकायत मिली तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। किसानों को उपज के दौरान जो खर्च लगते हैं, उसका बैनर एवं फ्लैक्स में लिखकर प्रचार प्रसार किया जाएगा। शेड में उपज को ढेर करने की प्राथमिकता किसान को ही मिलेगी।
सुरेश कुमार परते, सचिव कृषि उपज मंडी कुसमेली
मंडी समिति के माध्यम से पूर्व में पारित कांटा, तुलाई आदि के अलावा अन्य कोई राशि लेने का अधिकार किसी व्यापारी को नहीं है।
प्रतीक शुक्ला, छिंदवाड़ा अनाज व्यापारी संघ अध्यक्ष
Published on:
26 Sept 2024 11:01 am
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